- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर के वचनों की महत्ता
- I
- परमेश्वर के विश्वासियों का कम से कम बर्ताव बेहतर होना चाहिये।
- है सबसे अहम परमेश्वर के वचन रखना।
- चाहे कुछ हो जाए, परमेश्वर के वचन से दूर न जाना।
- परमेश्वर को जानना, ख़ुश करना, होता है उसके वचन से।
- तमाम पंथ, देश और सम्प्रदाय
- जीते जाएँगे भविष्य में उसके वचन से।
- सीधे बात करेगा परमेश्वर लोगों से,
- अपने हाथों में थामेंगे लोग उसके वचन।
- लोग इसके ज़रिये पूर्ण बनाए जाँएगे,
- हर जगह फैलते हैं परमेश्वर के वचन।
- अभ्यास करते हैं, बोलते हैं लोग परमेश्वर के वचन,
- अंतर में जो रखे हैं, वो भी हैं परमेश्वर के वचन।
- जिनका इस्तेमाल करता है परमेश्वर बोल सकते हैं वो उसके वचन।
- बोल नहीं सकते अगर तुम, तो ज़ाहिर है इससे,
- कार्य नहीं किया पवित्र आत्मा ने तुम में,
- पूर्णता हासिल नहीं की है तुमने।
- यही अहमियत है परमेश्वर के वचन की,
- परमेश्वर के वचन की, परमेश्वर के वचन की।
- II
- पूर्ण बनाए जाते हैं वे, भरे हुए हैं जो
- भीतर-बाहर परमेश्वर के वचन से।
- गवाही देते जो, इच्छा पूरी करते जो परमेश्वर की,
- हैं वे जिन्होंने अपनी वास्तविकता बनाया है परमेश्वर के वचन को।
- वचन के युग में प्रवेश करना,
- जाना जाता है जिसे हज़ार साल के राज्य-युग के रूप में,
- है ऐसा काम किया जा रहा है पूरा जिसे।
- अभ्यास करो संगति का जो कहता है परमेश्वर।
- खाकर, अनुभव कर, उसके वचन तुम,
- दिखा सकते हो परमेश्वर के वचन तुम।
- अनुभव के वचनों के बिना,
- परमेश्वर के वचनों के बिना, किसी को कायल नहीं,
- नहीं कर पाओगे तुम, नहीं कर पाओगे तुम।
- जिनका इस्तेमाल करता है परमेश्वर बोल सकते हैं वो उसके वचन।
- बोल नहीं सकते अगर तुम, तो ज़ाहिर है इससे,
- कार्य नहीं किया पवित्र आत्मा ने तुम में,
- पूर्णता हासिल नहीं की है तुमने।
- यही अहमियत है परमेश्वर के वचन की,
- परमेश्वर के वचन की, परमेश्वर के वचन की।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-जीवन के लिए संगीत
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