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सोमवार, 19 नवंबर 2018

परमेश्वर के वचनों की महत्ता

  • परमेश्वर के वचनों की महत्ता

  •  
  • I
  • परमेश्वर के विश्वासियों का कम से कम बर्ताव बेहतर होना चाहिये।
  • है सबसे अहम परमेश्वर के वचन रखना।
  • चाहे कुछ हो जाए, परमेश्वर के वचन से दूर न जाना।
  • परमेश्वर को जानना, ख़ुश करना, होता है उसके वचन से।
  • तमाम पंथ, देश और सम्प्रदाय
  • जीते जाएँगे भविष्य में उसके वचन से।
  • सीधे बात करेगा परमेश्वर लोगों से,
  • अपने हाथों में थामेंगे लोग उसके वचन।
  • लोग इसके ज़रिये पूर्ण बनाए जाँएगे,
  • हर जगह फैलते हैं परमेश्वर के वचन।
  • अभ्यास करते हैं, बोलते हैं लोग परमेश्वर के वचन,
  • अंतर में जो रखे हैं, वो भी हैं परमेश्वर के वचन।
  • जिनका इस्तेमाल करता है परमेश्वर बोल सकते हैं वो उसके वचन।
  • बोल नहीं सकते अगर तुम, तो ज़ाहिर है इससे,
  • कार्य नहीं किया पवित्र आत्मा ने तुम में,
  • पूर्णता हासिल नहीं की है तुमने।
  • यही अहमियत है परमेश्वर के वचन की,
  • परमेश्वर के वचन की, परमेश्वर के वचन की।
  • II
  • पूर्ण बनाए जाते हैं वे, भरे हुए हैं जो
  • भीतर-बाहर परमेश्वर के वचन से।
  • गवाही देते जो, इच्छा पूरी करते जो परमेश्वर की,
  • हैं वे जिन्होंने अपनी वास्तविकता बनाया है परमेश्वर के वचन को।
  • वचन के युग में प्रवेश करना,
  • जाना जाता है जिसे हज़ार साल के राज्य-युग के रूप में,
  • है ऐसा काम किया जा रहा है पूरा जिसे।
  • अभ्यास करो संगति का जो कहता है परमेश्वर।
  • खाकर, अनुभव कर, उसके वचन तुम,
  • दिखा सकते हो परमेश्वर के वचन तुम।
  • अनुभव के वचनों के बिना,
  • परमेश्वर के वचनों के बिना, किसी को कायल नहीं,
  • नहीं कर पाओगे तुम, नहीं कर पाओगे तुम।
  • जिनका इस्तेमाल करता है परमेश्वर बोल सकते हैं वो उसके वचन।
  • बोल नहीं सकते अगर तुम, तो ज़ाहिर है इससे,
  • कार्य नहीं किया पवित्र आत्मा ने तुम में,
  • पूर्णता हासिल नहीं की है तुमने।
  • यही अहमियत है परमेश्वर के वचन की,
  • परमेश्वर के वचन की, परमेश्वर के वचन की।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-जीवन के लिए संगीत

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