- परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने
- I
- इंसान की कद-काठी, ज्ञान, प्रेम, आस्था,
- आज्ञाकारिता और जो कुछ देखता है इंसान,
- आया है वो सब वचन के न्याय से।
- टिकी है आस्था तुम्हारी उसके वचन से।
- देखता है इंसान परमेश्वर के अद्भुत कार्य को इसके ज़रिये।
- बहुत कुछ है जो इंसान की समझ के परे है;
- चहुँ ओर हैं चमत्कार और रहस्य बड़े हैं।
- और बहुतों ने इसीलिये कर दिया समर्पण।
- उसके वचन के न्याय के परे कोई जाता नहीं,
- और अंधेरा कोई उसके अधिकार पर व्याप्त होता नहीं।
- इंसान होता है समर्पित, उसके देहधारण, अधिकार
- और वचन के न्याय की वजह से।
- II
- किया नहीं समर्पण जिन्होंने कभी, टेकते हैं घुटने समक्ष परमेश्वर के,
- जब होता है सामना उसके वचन से।
- झुकते हैं उसके वचन के न्याय के आगे,
- करते नहीं छानबीन या परख कभी अपनी ज़बाँ से।
- प्रकट होता है परमेश्वर देह में सामान्य मानव की तरह,
- मगर देखता है इंसान उसका अधिकार पूरा उसके वचन में।
- वो स्वयं परमेश्वर है, उसी की अभिव्यक्ति है उसके वचन में।
- कर सकता नहीं कोई अपमान उसका, वो परमेश्वर है देह में।
- III
- देहधारी परमेश्वर व्यक्त करता है अपने वचन,
- ताकि सुन सकें और कर सकें ग्रहण न्याय उसका सभी।
- रूह के रूप में आकर समर्पण के लिये इंसान को, परमेश्वर डराता नहीं।
- इस सच्चे और अपूर्व कार्य से उजागर होता है,
- असली स्वभाव इंसान का, जो गहरा दबा होता है,
- ताकि पहचानकर बदले इसे इंसान।
- न्याय परमेश्वर का है व्यवहारिक और पहुँचता है ज़रिये वचन के।
- परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने यही है।
- परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने यही है।
- उसके वचन के न्याय के परे कोई जाता नहीं,
- और अंधेरा कोई उसके अधिकार पर व्याप्त होता नहीं।
- इंसान होता है समर्पित, उसके देहधारण, अधिकार
- और वचन के न्याय की वजह से।
- उसके देहधारण, अधिकार और वचन के न्याय की वजह से।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-जीवन के लिए संगीत
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