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गुरुवार, 30 अगस्त 2018

परमेश्वर का अधिकार प्रतीक है उसकी पहचान का


  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन

  • I
  • ईश्वर जीवन है, सभी जीवों का स्रोत है।
  • ईश्वर का अधिकार सभी से उसके वचनों का पालन करवाता है,
  • उसके वचनों के अनुसार उन्हें अस्तित्व में लाता है,
  • उसकी आज्ञानुसार उन्हें जिलाता और सन्तान उत्पन्न करवाता है।
  • ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
  • और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
  • ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
  • जिसमें जीवन और चेतना हो।
  • और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।
  • II
  • यह सामर्थ्य, न व्यक्ति न वस्तु रखता है।
  • सृष्टिकर्ता ही केवल है जिसके पास है यह।
  • यह चिन्ह है उसके अद्वितीय पहचान की सार, हैसियत की,
  • और यह कहलाता है अधिकार।
  • ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
  • और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
  • ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
  • जिसमें जीवन और चेतना हो।
  • और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।
  • III
  • याद रखो, अलावा उसके, मानव या चीज़
  • का "अधिकार" शब्द से, या उसके सार से कोई लेना-देना नहीं है।
  • ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
  • और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
  • ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
  • जिसमें जीवन और चेतना हो।
  • और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।

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