- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर का अधिकार प्रतीक है उसकी पहचान का
- I
- ईश्वर जीवन है, सभी जीवों का स्रोत है।
- ईश्वर का अधिकार सभी से उसके वचनों का पालन करवाता है,
- उसके वचनों के अनुसार उन्हें अस्तित्व में लाता है,
- उसकी आज्ञानुसार उन्हें जिलाता और सन्तान उत्पन्न करवाता है।
- ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
- और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
- ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
- जिसमें जीवन और चेतना हो।
- और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।
- II
- यह सामर्थ्य, न व्यक्ति न वस्तु रखता है।
- सृष्टिकर्ता ही केवल है जिसके पास है यह।
- यह चिन्ह है उसके अद्वितीय पहचान की सार, हैसियत की,
- और यह कहलाता है अधिकार।
- ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
- और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
- ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
- जिसमें जीवन और चेतना हो।
- और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।
- III
- याद रखो, अलावा उसके, मानव या चीज़
- का "अधिकार" शब्द से, या उसके सार से कोई लेना-देना नहीं है।
- ईश्वर सब जीवों पे राज करता है,
- और इसमें कोई भूल नहीं होगी, हमेशा और सदा के लिए।
- ईश्वर का सामर्थ्य सृष्टि कर सकता है किसी भी चीज़ की
- जिसमें जीवन और चेतना हो।
- और यह निर्धारित होता है ईश्वर के जीवन द्वारा।
- "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-जीवन के अनुभव का एक भजन
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें