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बुधवार, 26 सितंबर 2018

कितना अहम है प्यार परमेश्वर का इंसान के लिये



  •  
  • I
  • "परमेश्वर का हुक्म आदम के लिये" - बाइबल की तस्वीर ये,
  • मार्मिक भी है, दिल को भी छूती है।
  • हालाँकि सिर्फ परमेश्वर और इंसान हैं तस्वीर में,
  • मगर कितना अंतरंग रिश्ता है दोनों में,
  • हैरानी भी होती है हमें, अनुराग भी जागता है दिल में।
  • II
  • परमेश्वर का लबालब प्यार मिलता है इंसान को उदारता से,
  • उसके आसपास ही है प्यार परमेश्वर का, परमेश्वर का।
  • मासूम, निर्मल, किसी भी बंधन से बेफिक्र इंसान,
  • रहता है आनंदित परमेश्वर की नज़र में।
  • परमेश्वर करता है परवाह इंसान की, रहता है इंसान परमेश्वर की देखरेख में।
  • इंसान के काम सारे, उसके वचन और कर्म सारे,
  • बंधे हैं परमेश्वर से, जो अलग हो नहीं सकते।
  • III
  • जिस पल बनाया इंसान को परमेश्वर ने,
  • उस पल से ली है ज़िम्मेदारी इंसान की परमेश्वर ने।
  • किस तरह की है ज़िम्मेदारी ये?
  • उसी को हिफ़ाज़त करनी है इंसान की, उसी को नज़र रखनी है इंसान पर।
  • वो चाहता है इंसान यकीन करे,
  • यकीन करे उसके वचनों पर और उनका पालन करे।
  • यही वो पहली चीज़ थी जो चाहता था परमेश्वर इंसान से।
  • IV
  • यही पहली उम्मीद लिये, परमेश्वर ने बोले ये वचन:
  • तू खा सकता है बाग के दरख्तों के सारे फल बेख़ौफ,
  • मगर तू न खाना भले-बुरे के ज्ञान के
  • दरख़्त के फल,
  • क्योंकि उस दिन गँवा बैठेगा तू जान अपनी,
  • जिस दिन तूने खाए उस दरख्त के फल।
  • परमेश्वर की इच्छा को ज़ाहिर करते ये मामूली वचन,
  • दिखलाते हैं उसके दिल में पहले ही फिक्र थी इंसान की।
  • V
  • देखते हैं इन मामूली वचनों में हम, क्या है दिल में परमेश्वर के।
  • क्या प्यार है उसके दिल में? क्या परवाह और चिंता नहीं है वहाँ?
  • महसूस किया जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है,
  • परमेश्वर के प्यार और परवाह को।
  • गर ज़मीर और इंसानियत है तेरे अंदर,
  • तो महसूस करेगा स्नेह, परवाह और प्यार परमेश्वर का तू,
  • महसूस करेगा खुशी से धन्य ख़ुद को तू।
  • VI
  • जब महसूस करेगा इन चीज़ों को, तो कैसे पेश आएगा परमेश्वर से तू?
  • क्या जुदा हो जाएगा उससे तू?
  • क्या भक्तिमय प्यार, नहीं उपजेगा तेरे दिल में?
  • क्या कशिश होगी उसके लिये तेरे दिल में?
  • देखते हैं हम इससे, कितना अहम है प्यार परमेश्वर का इंसान के लिये।
  • मगर उससे भी ज़्यादा अहम है, परमेश्वर का प्यार
  • इंसाँ महसूस कर पाए, इंसाँ समझ पाए।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-सुसमाचारीय संगीत

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