- जीवन के अनुभव का एक भजन
- खोयी मुक्ति कैसे वापस पाएं
- I
- तूने मुझसे पूछा, कब तक तेरे पीछे चलूँगा।
- तूने मुझसे पूछा, कब तक तेरे पीछे चलूँगा।
- मैं अर्पित करता हूँ, मैं अर्पित करता हूँ अपनी जवानी
- और तेरे साथ ज़िंदगी भर रहूँगा, और तेरे साथ ज़िंदगी भर रहूँगा।
- मेरे दिल की गहराइयों से, मेरे दिल की गहराइयों, से निकली आवाज़ें,
- और झकझोर दिया, और झकझोर दिया धरती और पहाड़ों को।
- वादा किया था आंसुओं में अपने प्यार का मैंने तुझसे,
- वादा किया था आंसुओं में अपने प्यार का मैंने तुझसे,
- पर अनजान था मैं, पर अनजान था मैं अपने ही ढोंग से।
- सालों के उतार-चढ़ाव से रंग फीका हुआ है प्यार का मेरे,
- झूठे हुए हैं वादे मेरे।
- बाग़ी था तुझसे मिलते, बाग़ी था तुझसे मिलते समय मैं;
- उदास बहुत हूँ अतीत की सोचते हुए।
- विश्वास बिना मेरे समर्पण ने बढ़ाया है तेरा दर्द।
- अब पता चला मैंने बहुत कम दिया है,
- बस शब्दों से ही तेरा कर्ज़ चुकाया है।
- ख़्वाब से जगकर, ख़्वाब से जगकर मैं परेशान हूँ अपने लिए।
- कैसे मैं पाऊँ खोई मुक्ति अपनी?
- II
- खोया बहुत और पाया बहुत कम इन सालों में।
- किसको कहूँ कि कितना है अफ़सोस मुझे?
- कम उम्री और नादानी में मैंने सताया है बहुत तुझे,
- पर नहीं थी मुझे कद्र, तेरी इनायतों की।
- हड़बड़ी के, हड़बड़ी के इस आने-जाने में,
- दिल से दिल मिलाकर बातें कभी हुई नहीं।
- इत्तेफाक से मिला तुझसे और पहचान न सका,
- इत्तेफाक से मिला तुझसे और पहचान न सका,
- बढ़ाया मेरे, बढ़ाया मेरे दिल का अफ़सोस और भी ज़्यादा।
- अब पता चला मैंने बहुत कम दिया है,
- बस शब्दों से ही तेरा कर्ज़ चुकाया है।
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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