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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

खोयी मुक्ति कैसे वापस पाएं

  • जीवन के अनुभव का एक भजन
  • खोयी मुक्ति कैसे वापस पाएं

  •  
  • I
  • तूने मुझसे पूछा, कब तक तेरे पीछे चलूँगा।
  • तूने मुझसे पूछा, कब तक तेरे पीछे चलूँगा।
  • मैं अर्पित करता हूँ, मैं अर्पित करता हूँ अपनी जवानी
  • और तेरे साथ ज़िंदगी भर रहूँगा, और तेरे साथ ज़िंदगी भर रहूँगा।
  • मेरे दिल की गहराइयों से, मेरे दिल की गहराइयों, से निकली आवाज़ें,
  • और झकझोर दिया, और झकझोर दिया धरती और पहाड़ों को।
  • वादा किया था आंसुओं में अपने प्यार का मैंने तुझसे,
  • वादा किया था आंसुओं में अपने प्यार का मैंने तुझसे,
  • पर अनजान था मैं, पर अनजान था मैं अपने ही ढोंग से।
  • सालों के उतार-चढ़ाव से रंग फीका हुआ है प्यार का मेरे,
  • झूठे हुए हैं वादे मेरे।
  • बाग़ी था तुझसे मिलते, बाग़ी था तुझसे मिलते समय मैं;
  • उदास बहुत हूँ अतीत की सोचते हुए।
  • विश्वास बिना मेरे समर्पण ने बढ़ाया है तेरा दर्द।
  • अब पता चला मैंने बहुत कम दिया है,
  • बस शब्दों से ही तेरा कर्ज़ चुकाया है।
  • ख़्वाब से जगकर, ख़्वाब से जगकर मैं परेशान हूँ अपने लिए।
  • कैसे मैं पाऊँ खोई मुक्ति अपनी?
  • II
  • खोया बहुत और पाया बहुत कम इन सालों में।
  • किसको कहूँ कि कितना है अफ़सोस मुझे?
  • कम उम्री और नादानी में मैंने सताया है बहुत तुझे,
  • पर नहीं थी मुझे कद्र, तेरी इनायतों की।
  • हड़बड़ी के, हड़बड़ी के इस आने-जाने में,
  • दिल से दिल मिलाकर बातें कभी हुई नहीं।
  • इत्तेफाक से मिला तुझसे और पहचान न सका,
  • इत्तेफाक से मिला तुझसे और पहचान न सका,
  • बढ़ाया मेरे, बढ़ाया मेरे दिल का अफ़सोस और भी ज़्यादा।
  • अब पता चला मैंने बहुत कम दिया है,
  • बस शब्दों से ही तेरा कर्ज़ चुकाया है।
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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