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मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

अपने वचनों और कार्यों को कैसे समझना चाहिये तुम्हें



  • अपने वचनों और कार्यों को कैसे समझना चाहिये तुम्हें

  •  
  • I
  • क्या परमेश्वर के वचनों में, प्रतिकार में विश्वास है तुम्हें?
  • कि सज़ा देगा वो उन्हें जो कपट करते हैं, धोखा देते हैं उसे?
  • तुम चाहते हो वो दिन जल्दी आए या बाद में?
  • क्या ख़ौफ खाते हो तुम सज़ा से,
  • या सज़ा है, ये जानकर भी परमेश्वर का विरोध करोगे?
  • और जब आएगा वो दिन तो
  • रोओगे या ख़ुशियाँ मनाओगे तुम?
  • आशावान हो या भयभीत हो तुम
  • कि पूरे होंगे परमेश्वर के सभी वचन?
  • अगर उम्मीद है तुम्हें परमेश्वर शीघ्र प्रस्थान करेगा,
  • अपने वचनों को पूरा करने,
  • तो कैसे समझना चाहिये अपने शब्दों और कामों को तुम्हें?
  • अगर इसके होने की उम्मीद नहीं तुम्हें,
  • तो विश्वास ही क्यों करते हो तुम परमेश्वर में?
  • II
  • किस तरह के अंत की कामना है तुम्हें?
  • परमेश्वर में विश्वास है या शक है तुम्हें?
  • क्या विचारे हैं वो नतीजे और अंत तुमने,
  • जो लाएंगे काम और बर्ताव तुम्हारे?
  • आशावान हो या भयभीत हो तुम
  • कि पूरे होंगे परमेश्वर के सभी वचन।
  • अगर उम्मीद है तुम्हें परमेश्वर शीघ्र प्रस्थान करेगा,
  • अपने वचनों को पूरा करने,
  • तो कैसे समझना चाहिये अपने शब्दों और कामों को तुम्हें?
  • अगर इसके होने की उम्मीद नहीं तुम्हें,
  • तो विश्वास ही क्यों करते हो तुम परमेश्वर में?
  • III
  • क्या जानते हो क्यों करते हो अनुसरण परमेश्वर का तुम?
  • अपने ज्ञान की सीमाओं को बढ़ाने के लिये करते हो अगर,
  • फिर ज़रूरी नहीं सहो इन परेशानियों को तुम।
  • लेकिन धन्य होने, आपदा से बचने के लिये करते हो अगर,
  • तो फिर चिंतित क्यों नहीं हो तुम अपने आचरण को लेकर?
  • क्यों नहीं पूछते हो ख़ुद से तुम,
  • क्या पूरा कर सकते हो परमेश्वर की माँगों को तुम?
  • या भविष्य की आशीषों को पाने के लायक हो तुम?
  • अगर उम्मीद है तुम्हें परमेश्वर शीघ्र प्रस्थान करेगा,
  • अपने वचनों को पूरा करने,
  • तो कैसे समझना चाहिये अपने शब्दों और कामों को तुम्हें?
  • अगर इसके होने की उम्मीद नहीं तुम्हें,
  • तो विश्वास ही क्यों करते हो तुम परमेश्वर में?
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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