- मसीही गीत-ईश्वर का संरक्षण सदा मानवजाति के लिए है
- I
- देखते हैं ईश्वर अपनी सृष्टि, हैं देखते, दिन-प्रतिदिन, निहारते।
- विनय से छिप कर वे, मानव-जीवन परखते, इंसाँ के हर काम देखते।
- कौन हैं जो सच में प्रभु को समर्पित हुए?
- किसी ने किया कभी सच्चाई की साधना?
- किसने माना प्रभु को ह्रदय से, वादे निभाए और,
- कर्तव्य पूरे किये?
- किसने बसाया प्रभु को कभी अपने ह्रदय में?
- किसने प्रभु को अपने प्राणों सा प्यारा माना?
- किसने देखा उनके दिव्य पूर्ण रूप को,
- और ईश्वर को छूना चाहा?
- जब डूबने लगता है मानव, बचाते उनको परमेश्वर,
- जब जीवन का नहीं कर पाते सामना, उठाते उनको परमेश्वर
- और देते हैं हौंसला फिर जीने के लिए,
- उन्हें देते हैं दूसरा मौका।
- तो वे मानेंगे उन्हें आधार अपना,
- जब वे करें अवज्ञा, तो इस मौके पर, प्रभु देते हैं अपना परिचय।
- II
- प्रभु देखते हैं लोगों का स्वभाव पुराना,
- और करुणा कर देते हैं मौका पश्चाताप का और नए आरंभ का।
- जब तक है बाकि उनमें एक सांस भी, प्रभु बचाएंगे उनको मौत से।
- कितनी बार देखे हैं लोगों ने उनके बढ़ते हाथ?
- कितनी बार उनकी आँखों में दया?
- और पाई हर पल उनके चेहरे पर मुस्कान?
- और कितनी बार उनके रोष और वैभव को देखा?
- जब डूबने लगता है मानव, बचाते उनको परमेश्वर,
- जब जीवन का नहीं कर पाते सामना, उठाते उनको परमेश्वर
- और देते हैं हौंसला फिर जीने के लिए,
- उन्हें देते हैं दूसरा मौका।
- तो वे मानेंगे उन्हें आधार अपना,
- जब वे करें अवज्ञा, तो इस मौके पर, प्रभु देते हैं अपना परिचय।
- III
- हालांकि उन्हें कभी मानव ने जाना नहीं,
- उनकी दुर्बलताओं पर प्रभु कभी हँसते नहीं;
- उनके कष्टों को देते हमदर्दी,
- दंड देते हैं तभी जब वे हो जाते दूर।
- जब डूबने लगता है मानव, बचाते उनको परमेश्वर,
- जब जीवन का नहीं कर पाते सामना, उठाते उनको परमेश्वर
- और देते हैं हौंसला फिर जीने के लिए,
- उन्हें देते हैं दूसरा मौका।
- तो वे मानेंगे उन्हें आधार अपना,
- जब वे करें अवज्ञा, तो इस मौके पर, प्रभु देते हैं अपना परिचय।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-मसीही गीत
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें