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रविवार, 12 मई 2019

विश्वास गाइड-वैसी प्रार्थना कैसे करें जो परमेश्वर सुनें

विश्वास गाइड-वैसी प्रार्थना कैसे करें जो परमेश्वर सुनें

 वैसी प्रार्थना कैसे करें जो परमेश्वर सुनें


चेंग शी
भाइयो और बहनो:
प्रभु की शांति आपके साथ हो! प्रार्थना करना हम ईसाइयों का, परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। ऐसा विशेष रूप से सुबह और रात के समय किया जाता है। यही कारण है कि प्रार्थना करना सीखना बेहद जरूरी है। हालाँकि, कई भाई-बहन परेशानी महसूस करते हैं: हर दिन, हम सुबह और रात, दोनों समय प्रार्थना करते हैं; हम खाने से पहले और और खाने के बाद भी प्रार्थना करते हैं, साथ ही साथ जब हम सभा में होते हैं तब भी प्रार्थना करते हैं; इसके अलावा, हर बार जब हम प्रार्थना करते हैं, हम प्रभु से बहुत कुछ कहते हैं और लंबे समय तक प्रार्थना करते हैं।

शनिवार, 11 मई 2019

ईसाई जीवन: 4 सलाह, जो प्रभु की मंशा के अनुरूप दूसरों के साथ आपसी संवाद करने का तरीका सिखाते हैं

ईसाई जीवन: 4 सलाह, जो प्रभु की मंशा के अनुरूप दूसरों के साथ आपसी संवाद करने का तरीका सिखाते हैं

वांग ज़ीहान, शांक्सी प्रान्त
पारस्परिक संबंध एक ऐसा विषय है जो कई लोगों के सिर में दर्द पैदा कर देता है। यह एक ऐसा विषय भी है जिसका अक्सर ईसाई के रूप में एक व्यक्ति पूरे जीवन भर सामना करता है। प्रभु यीशु की अपेक्षा है कि हम एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में मिलकर रहें और दूसरों से अपने समान प्यार करें। कई आस्थावान ईसाई भी प्रभु की शिक्षाओं को अभ्यास में लाने के इच्छुक हैं। हालांकि, हकीकत में, जब हम दूसरों के साथ बातचीत करते हैं, तो हम अक्सर संघर्ष और गलतफहमी का सामना करते हैं, वो भी इतना कि हमारे रिश्ते कठोर होकर टूट जाते हैं। इससे हर किसी को दर्द होता है। क्या कारण है कि हम एक-दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से रहने में असमर्थ हैं? प्रभु की मंशा के अनुसार हम ईसाई अपने जीवन में दूसरों के साथ कैसे बातचीत कर सकते हैं? अतीत में मुझे जो कठिनाई हुई है, उसमें यह समस्या भी रही है। प्रभु के मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद! बाद में, मुझे एक पुस्तक में इस सवाल का जवाब मिला, जिसने मेरी कठिनाइयों का समाधान कर दिया। यहां, मैं अपने अनुभव और समझ के बारे में कुछ बताने जा रही हूँ!

मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

जीवन के लिए संगीत-अंधेरे और दमन के बीच उठ खड़े होना



  • आराधना गीत
  • अंधेरे और दमन के बीच उठ खड़े होना

  •  
  • I
  • मज़बूत इच्छा के साथ बुराई की गर्जना के खिलाफ़ हूं मैं खड़ा।
  • कठिन राह पर, मेरा दिल हो जाता है दृढ़ और मज़बूत।
  • सच्चा प्रकाश करता है मेरा मार्गदर्शन, मैं चलूंगा उसके पीछे।
  • मानव जाति है बहुत क्रूर, परमेश्वर के लिए कहाँ है जगह?
  • शैतानों की शासित भूमि में परमेश्वर पर विश्वास है बहुत मुश्किल।
  • मैं शैतान को त्याग दूंगा, परमेश्वर के पीछे चलूंगा।
  • परमेश्वर से प्यार करता हुआ मेरा दिल, फैलाएगा रोशनी और गर्मी,
  • अंत तक वफ़ादार रहेगा,
  • परमेश्वर को महिमान्वित करने के लिए देगा गवाही।

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

आराधना के गी-विजय कार्य का अंदरूनी अभिप्राय



  • विजय कार्य का अंदरूनी अभिप्राय

  •  
  • I
  • लौटना परमेश्वर के पास फिर से, हैं इंसान की जीत के अंदरूनी मायने।
  • त्याग कर शैतान को पूरी तरह लौटना है पास परमेश्वर के, इंसान को।
  • है यही पूरी तरह इंसान का उद्धार। मुश्किलों भरी जीत है जंग आखिरी।
  • आख़िरी पड़ाव है ये परमेश्वर के विजय-लक्ष्य का।
  • बच नहीं सकता बिना इसके कोई इंसान, जीता जा नहीं सकता है शैतान,
  • लक्ष्य बेहतर पा नहीं सकता कोई इंसान।
  • शैतान के पंजे में है हर कोई इंसान।
  • है ज़रूरी पहले हार हो शैतान की, ताकि फिर इंसानों का उद्धार हो।
  • क्योंकि हर काम परमेश्वर का है इंसान की ख़ातिर।

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

परमेश्वर में विश्वास-केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो



परमेश्वर में विश्वास-केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो

मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य परस्पर क्रिया के समान प्रतीत होता है, जैसे कि यह मानव प्रबंधों के द्वारा उत्पन्न हुआ हो, या मानविक हस्तक्षेप के माध्यम से। परन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी होती है और परमेश्वर के लिए एक दृढ़ गवाह बने रहने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब की परीक्षा ली जा रही थी: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के सामने शर्त लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कार्य थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था।

रविवार, 24 फ़रवरी 2019

परमेश्वर में विश्वास-केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक



परमेश्वर में विश्वास-केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

आज, जैसे तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, एक प्रकार से तुम लोगों को कठिनाई और परिष्करण से होकर जाना होगा और दूसरे में, तुम लोगों को एक मूल्य चुकाना होगा। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा कुछ भी गहरा सबक नहीं है और ऐसा कहा जा सकता है कि सबक जो मनुष्य जीवन भर विश्वास करने से सीखते हैं वह परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करना होता है। अर्थात् यदि तू परमेश्वर पर विश्वास करता है तो तुझे उसे प्रेम करना होगा। यदि तू केवल परमेश्वर पर विश्वास करता है परन्तु उससे प्रेम नहीं करता है, परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है, और कभी भी परमेश्वर को अपने हृदय से निकलने वाले सच्चे प्रेम से प्रेम नहीं किया है, तो परमेश्वर पर तेरा विश्वास करना व्यर्थ है; यदि परमेश्वर पर अपने विश्वास में, तू परमेश्वर से प्रेम नहीं करता है, तो तू व्यर्थ में ही जी रहा है, और तेरा सम्पूर्ण जीवन सभी जीवन से सबसे निम्न स्तर पर है।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

आराधना के गी-परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट रही है सभी के लिए



  • परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए
  •  
  • I
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

परमेश्वर से प्रेम-परमेश्वर स्वयं के लिए इंसान की सच्ची आस्था और प्रेम पाने की करता है आशा



  • परमेश्वर स्वयं के लिए इंसान की सच्ची आस्था और प्रेम पाने की करता है आशा

  •  
  • परमेश्वर करता है आशा, जब तुम समझो,
  • उसके सच्चे रूप को,
  • तुम हो जाओगे उनके और करीब;
  • सच्चे दिल से समझोगे उनके प्रेम को,
  • इंसानियत के लिए उनकी चिंता की करोगे सच्ची तारीफ़;
  • अपने दिल को सौंप दोगे उनके हाथ में,
  • न रहेगा शंका न होगा कोई संदेह उनके बारे में,
  • इंसान के लिए वो सब कुछ करते हैं, लेकिन चुपके से,
  • उनकी सच्चाई, निष्ठा और प्यार मिलता है इंसान को चुपके से।

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात

अब आओ हम नीचे दिए पवित्र शास्त्र के अंश को पढ़ें
12. अपने पुनरूत्थान के बाद अपने चेलों के लिए यीशु के वचन
(यूहन्ना 20: 26-29) आठ दिन के बाद उसके चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था; और द्वार बंद थे, तब यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा, "तुम्हें शान्ति मिले।" तब उसने थोमा से कहा, "अपनी उँगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल, और अविश्वासी नहीं परंतु विश्वासी हो।" यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, "हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! यीशु ने उससे कहा, तू ने मुझे देखा है, क्या इसलिए विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया।"

शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग एक



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग एक

इन अनेक सभाओं ने प्रत्येक व्यक्ति पर एक बड़ा प्रभाव डाला है। अब तक तो, लोग वास्तव में परमेश्वर के सच्चे अस्तित्व का एहसास कर पाये होंगे और यह कि परमेश्वर वास्तव में उन के अति निकट है। यद्यपि लोगों ने बहुत सालों से परमेश्वर पर विश्वास किया है, फिर भी उन्होंने उसके विचारों और युक्तियों को सचमुच में कभी भी वैसा नहीं समझा है जैसा वे अब समझते हैं, और ना ही उन्होंने उसके व्यावहारिक कार्यों को सचमुच में वैसा अनुभव किया है जैसा वे अब करते हैं। चाहे उस का ज्ञान हो या वास्तविक अभ्यास, अधिकतर लोगों ने कुछ नया सीखा है और एक ऊँची समझ को प्राप्त किया है, और भूतकाल में जो कुछ वे स्वयं कर रहे थे उसमें हुई ग़लती को महसूस किया है, अपने अनुभव के छिछलेपन का एहसास किया है और यह कि किसी चीज़ की अधिकता परमेश्वर के इच्छानुसार नहीं होता है, और यह महसूस किया कि जिस बात की मनुष्य में सब से ज़्यादा कमी है वह है परमेश्वर के स्वभाव का ज्ञान।

सोमवार, 28 जनवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग दो



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग दो

अब्राहम के समय के समान ही इस अवधि के दौरान, परमेश्वर ने एक शहर को भी नष्ट किया था। यह शहर सदोम कहलाता था। निःसन्देह, बहुत से लोग सदोम की कहानी से परिचित हैं, परन्तु कोई भी परमेश्वर के विचारों से परिचित नहीं है जो इस नगर के उसके विनाश की पृष्ठभूमि थी।
और इस प्रकार आज, अब्राहम के साथ परमेश्वर के निम्नलिखित संवाद के माध्यम से, हम उस समय के उसके विचारों को सीखेंगे, साथ ही इसी बीच उसके स्वभाव के विषय में भी जानेंगे। इसके आगे, आओ हम पवित्र शास्त्र के निम्नलिखित अंश को पढ़ें।

गुरुवार, 24 जनवरी 2019

मसीही गीत-ईश्वर का संरक्षण सदा मानवजाति के लिए है



  • मसीही गीत-ईश्वर का संरक्षण सदा मानवजाति के लिए है

  •  
  • I
  • देखते हैं ईश्वर अपनी सृष्टि, हैं देखते, दिन-प्रतिदिन, निहारते।
  • विनय से छिप कर वे, मानव-जीवन परखते, इंसाँ के हर काम देखते।
  • कौन हैं जो सच में प्रभु को समर्पित हुए?
  • किसी ने किया कभी सच्चाई की साधना?
  • किसने माना प्रभु को ह्रदय से, वादे निभाए और,
  • कर्तव्य पूरे किये?
  • किसने बसाया प्रभु को कभी अपने ह्रदय में?
  • किसने प्रभु को अपने प्राणों सा प्यारा माना?

शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन



परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन

पवित्र आत्मा के कार्य का प्रत्येक चरण उसी समय मनुष्य की गवाही की भी अपेक्षा करता है। कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर एवं शैतान के मध्य एक युद्ध है, और इस युद्ध का लक्ष्य शैतान है, जबकि वह शख्स जिसे इस कार्य के द्वारा पूर्ण बनाया जाएगा वह मनुष्य है। परमेश्वर का कार्य फलवन्त हो सकता है या नहीं यह परमेश्वर के प्रति मनुष्य की गवाही के तरीके पर निर्भर करता है। यह गवाही वह बात है जिसकी अपेक्षा परमेश्वर उन लोगों से करता जो उसका अनुसरण करते हैं; यह वह गवाही है जिसे शैतान के सामने दी जाती है, और यह उसके कार्य के प्रभावों का प्रमाण भी है।

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो



पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो

शुरुआत में, जब यीशु ने आधिकारिक रूप से अपनी सेवकाई को क्रियान्वित नहीं किया था, उन चेलों के समान जिन्होंने उनका अनुसरण किया था, वह भी कई बार सभाओं में सम्मिलित हुआ, और आत्मिक भजनों को गाया, प्रशंसा की, और मन्दिर में पुराना नियम पढ़ा। जब उसने बपतिस्मा लिया और बाहर आया उसके बाद, आत्मा आधिकारिक रूप से उस पर उतरा और कार्य करना शुरू किया, और अपनी पहचान एवं उस सेवकाई को प्रकट किया जिसे वह शुरू करनेवाला था। इससे पहले, कोई उसकी पहचान को नहीं जानता था, और मरियम को छोड़कर, यहाँ तक कि यूहन्ना भी नहीं जानता था।

बुधवार, 2 जनवरी 2019

परमेश्वर की इंसान से अंतिम अपेक्षा



  •  
  • I
  • अगर तू सेवा करने वाला है,
  • तो क्या वफादारी से कर सकता है सेवा परमेश्वर की,
  • बिना निष्क्रिय या बिना लापरवाह हुए?
  • जान ले तू अगर, कभी सराहता नहीं तुझे परमेश्वर,
  • जीवनभर सेवा करेगा फिर भी तू डटा रहकर?
  • तेरी तमाम कोशिशों के बावजूद अगर, बेपरवाह है तुझसे परमेश्वर,
  • क्या फिर भी काम करेगा तू उसके लिये गुमनामी में रहकर?

मंगलवार, 1 जनवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग एक



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग एक

हमारी पिछली सभा के दौरान हमने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय को आपस में साझा किया था। क्या तुम लोगों को स्मरण है कि वह क्या था? मुझे इसे दोहराने दो। हमारी पिछली सहभागिता का विषय था: परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर। क्या यह तुम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है? इसका कौन सा भाग तुम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है? परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव या स्वयं परमेश्वर? तुम लोगों को किस में सबसे ज्यादा रूचि है? तुम लोग किस भाग के विषय में सबसे अधिक सुनना चाहते हो?

शनिवार, 22 दिसंबर 2018

चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार



  • चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार

  •  
  • I
  • परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
  • चाहे कैसे भी वो करता है,
  • या किसी भी रूप में,
  • लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
  • है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
  • उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

परमेश्वर के कार्य के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाओ



  • परमेश्वर के कार्य के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाओ

  •  
  • I
  • परमेश्वर का आत्मा कर रहा है महान काम अभी।
  • अन्य जातियों के बीच हो चुका है शुरू काम उसका।
  • तेज़ी से और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए,
  • वो सभी सृजित प्राणियों को वर्गों में है बांटता।
  • अपना पूरा अस्तित्व समर्पित कर दो उसके काम के लिए।
  • समझो और जानो वो सब कुछ किया जो उसने तुम्हारे लिए।
  • अपनी सारी ताक़त लगा दो, उसका काम बनाओ प्रभावी।
  • यही है जो तुम्हें है समझना।

बुधवार, 19 दिसंबर 2018

स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव



  • स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव

  •  
  • I
  • स्वभाव में बदलाव है प्रकृति में बदलाव।
  • नहीं दिखती प्रकृति किसी के व्यवहार में,
  • इसमें शामिल हैं अर्थ और मोल जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं मूल्य इंसानी जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं आत्मा की गहरी बातें, सार इंसान के अस्तित्व का।

रविवार, 16 दिसंबर 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन



मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन

परमेश्वर में जीवधारियों के प्रति कोई द्वेष नहीं है और वह केवल शैतान को पराजित करना चाहता है। उसके सम्पूर्ण कार्य-चाहे वह ताड़ना हो या न्याय – को शैतान की ओर निर्देशित किया गया है; इसे मानवजाति के उद्धार के लिए सम्पन्न किया जाता है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और इसका एक उद्देश्य है: बिलकुल अन्त तक शैतान के साथ युद्ध करना! और परमेश्वर जब तक शैतान पर विजय प्राप्त ना कर ले वह कभी विश्राम नहीं करेगा! वह विश्राम तभी करेगा जब वह एक बार शैतान को हरा दे।

आध्यात्मिक युद्ध में परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए 3 अचूक तरीके

आध्यात्मिक युद्ध में परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए 3 अचूक तरीके जिनशिंग, दक्षिणी कोरिया भाइयो और बहनो, आप सबको प्रभु की शांति मिले! अ...