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रविवार, 6 जनवरी 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है



  •  
  • I
  • प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह,
  • सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सम्मुख सबके।
  • हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह;
  • स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो।
  • जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी।
  • परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका, स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके।
  • सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके।
  • हर चीज़ जगत की है चरण-पीठ उसकी, आँखें अग्नि-लौ की मानिंद उसकी,
  • दुधारी तलवार मुख में, दाएं हाथ में सप्त-तारे।
  • राज्य-पथ असीम और प्रकाशमान,
  • उदित होकर जगमगाती महिमा परमेश्वर की।
  • पर्वत जयजयकार करें, जल ख़ुशियाँ मनाएँ;
  • सूरज, चाँद-सितारे घूमें अपनी व्यवस्था में,
  • करें अगवानी एक सच्चे परमेश्वर की,
  • पूरी की जिसने प्रबंधन योजना छ: हज़ार वर्षों की, लौटा है जीतकर!
  • II
  • नाचें-कूदें आनंद मनाएं, जयजयकार करें परमेश्वर की सब।
  • सच्चा सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
  • आसीन होता अपने सिंहासन पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
  • उसके पवित्र नाम का गुणगान करो!
  • सर्वशक्तिमान की विजय-पताका लहराती, भव्य रूप में सिय्योन पर्वत पर!
  • करता हर देश जयजयकार, गाता हर इक जन ऊँचे-साफ़ सुर में!
  • आनंदित है सिय्योन पर्वत, उभर रही है महिमा परमेश्वर की!
  • सोचा न था सपने में भी भेंट कभी होगी उससे,
  • पर आज हुई भेंट सचमुच परमेश्वर से।
  • रूबरू होता हूँ हर दिन, खोल देता हूँ दिल अपना आगे उसके।
  • स्रोत है मेरे खान-पान का परमेश्वर, हर चीज़ की आपूर्ति करता परमेश्वर।
  • जीवन, वचन, चिंतन, विचार और क्रियाएं,
  • चमके उसकी महिमा उन पर जब वो हर कदम पर राह दिखाए।
  • नाफ़रमानी करे कोई दिल अगर,
  • न्याय फ़ौरन आ जाए, न्याय फ़ौरन आ जाए।
  • III
  • खाऊँ-पिऊँ, रहूँ साथ परमेश्वर के;
  • आनंद मनाऊँ और साथ चलूँ परमेश्वर के।
  • पाऊँ महिमा और आशीष एक साथ, राज करूँ उसके राज्य में उसके साथ।
  • ओह, इतना आनंद! और इतनी मधुरता!
  • रूबरू उसके हर दिन, वो हमसे बतियाँ करता।
  • करते बातें उससे, प्रबुद्ध होते हर दिन, और देखते कुछ नया हर नये दिन।
  • खुले हमारे नयन आत्मिक, हुए उजागर रहस्य आध्यात्मिक!
  • मुक्त है जीना पवित्र जीवन। रोको न तुम अपने कदम।
  • बढ़ते जाओ आगे-आगे, आगे है एक अद्भुत जीवन।
  • मधुर ज़ायका पा लेना बस नाकाफ़ी है, परमेश्वर की ओर रहो गतिमान तुम।
  • सब चीज़ों का समावेश है, और प्रचुर हैं,
  • अगर कहीं कुछ कम है, तो वो है उसके हाथों में।
  • करो सक्रिय सहयोग, करो प्रवेश उसके अंतर में,
  • नहीं रहेगा फिर कुछ भी पहले जैसा।
  • ऊँचा होगा जीवन हमारा,
  • न कर पाएगा परेशान कोई इंसान, कोई बात, न चीज़ कोई।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से

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