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मंगलवार, 28 मई 2019

ईसाई परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करने और गवाही देने के लिए अपनी जान जोख़िम में क्यों डालते हैं?

सत्य और झूठ के बीच विवाद -ईसाई परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करने और गवाही देने के लिए अपनी जान जोख़िम में क्यों डालते हैं?

ईसाई परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करने और गवाही देने के लिए अपनी जान जोख़िम में क्यों डालते हैं?

होउ ज़ींगके (सार्वजनिक सुरक्षा केंद्र का प्रमुख): चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शासनवाले देश में तुम लोगों के लिए यह बिल्कुल नामुमकिन है कि परमेश्वर में विश्वास कर सको और सुसमाचार का का प्रचार कर सको। जो कोई भी परमेश्वर में आस्था रखने और सुसमाचार का प्रसार करने पर जोर देता है उसको मिटा दिया जायेगा।

बुधवार, 27 मार्च 2019

आराधना के गी-ऊँचे सुर में स्तुति करो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की



  •  
  • I
  • अंत के दिनों का मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट हुआ
  • दुनिया के पूरब में।
  • वो सत्य बोलता है, इंसान को बचाने,
  • वो उद्धारक का प्रकटन है।
  • परमेश्वर जन सुनते उसकी वाणी को,
  • उठाये जाते हैं उसके सिंहासन के समक्ष।
  • खाते-पीते हम उसके वचनों को,
  • जानें हम सत्य और रहस्यों को,
  • पूरी तरह जीत लिया परमेश्वर के वचनों ने हमको।

बुधवार, 13 मार्च 2019

आराधना के गी-जीने के लिये इंसान के पास सत्य होना चाहिये



  • जीने के लिये इंसान के पास सत्य होना चाहिये

  •  
  • I
  • भरोसा है जिसे परमेश्वर में,
  • नीरस ज़िंदगी से बचने के लिये,
  • उसके पास परमेश्वर के वचन होने चाहिये।
  • चमकती है रोशनी परमेश्वर के वचनों से,
  • कौन हूँ मैं जानता नहीं, बग़ैर परमेश्वर के वचनों के।
  • परमेश्वर के करीब अपने दिल को रखने के लिये,
  • हमें उसके वचन पढ़ने चाहिये,
  • सत्य के संग अक्सर संवाद करना चाहिये।
  • परमेश्वर का अनुमोदन पाने के लिये,
  • हमें सत्य की खोज करनी चाहिये।

शनिवार, 9 मार्च 2019

जीवन के लिए संगीत-जीवन की गवाही



  • जीवन की गवाही

  •  
  • I
  • परमेश्वर की गवाही देने के कारण
  • मुझे ले लिया जाएगा हिरासत में एक दिन।
  • अपने दिल में मुझे है पता यह पीड़ा है
  • धार्मिकता के लिए।
  • अगर मेरी ज़िंदगी पलक झपकते ही गुज़र जाती है,
  • मुझे फिर भी है फ़ख्र मसीह के पीछे चलने का
  • इस जीवन में उसकी गवाही देने का।
  • अगर मैं राज्य के सुसमाचार का विस्तार
  • देखने के लिए जीवित नहीं रहता,
  • मैं फिर भी ख़ूबसूरत कामनाएं अर्पित करूंगा।

सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का स्वभाव-परमेश्वर न्याय संग उतरता है



  • परमेश्वर का स्वभाव-परमेश्वर न्याय संग उतरता है

  •  
  • I
  • बड़े लाल अजगर के देश में उतरते समय,
  • परमेश्वर का मुख फिरता जगत की ओर, और वो थरथराती।
  • हे परमेश्वर! हे परमेश्वर!
  • बड़े लाल अजगर के देश में उतरते समय,
  • परमेश्वर का मुख फिरता जगत की ओर, और वो थरथराती।
  • क्या कोई स्थान है जो उसके न्याय से बचा है?
  • या उसकी भयानक सज़ा से?
  • जहाँ वो जाता विनाश का बीज है बोता,
  • पर इसके द्वारा वो उद्धार करता और प्रेम अनन्त दिखाता।

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग पांच के क्रम में



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग पांच के क्रम में

अय्यूब का असली चेहरा: सच्चा, शुद्ध, और बिना किसी असत्य का
आओ हम निम्नलिखित अंश को पढ़ें: "तब शैतान यहोवा के सामने से निकला, और अय्यूब को पाँव के तलवे से ले सिर की चोटी तक बड़े बड़े फोड़ों से पीड़ित किया। तब अय्यूब खुजलाने के लिये एक ठीकरा लेकर राख पर बैठ गया" (अय्यूब 2:7-8)। यह अय्यूब के आचरण का चित्रण है जब उसके शरीर पर फोड़े निकल आए थे। इस समय, अय्यूब दर्द सहते हुए राख पर बैठ गया। किसी ने भी उससे व्यवहार नहीं की, और किसी ने भी उसके शरीर के दर्द को कम करने के लिए सहायता नहीं की; इसके बजाए, उसने अपने फोड़ों की सतह को खुजाने के लिए एक ठीकरे का इस्तेमाल किया।

गुरुवार, 31 जनवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग पांच



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग पांच

अय्यूब के विषय में
अय्यूब किस प्रकार परीक्षाओं से होकर गुज़रा था इन बातों को सीखने के बाद, तुम में से अधिकांश लोग संभवतः अय्यूब के विषय में और भी अधिक ब्योरों को जानना चाहोगे, खासतौर पर उस रहस्य के सम्बन्ध में जिसके द्वारा उसने परमेश्वर की प्रशंसा को हासिल किया था। अतः आज, आओ हम अय्यूब के बारे में बात करें!
हम अय्यूब के दैनिक जीवन में खराई, सीधाई, परमेश्वर का भय, और बुराई से दूरी को देखते हैं
यदि हमें अय्यूब के बारे में बातचीत करनी है, तो हमें उसके विषय में उस आंकलन के साथ शुरुआत करना होगा जो परमेश्वर के मुख से कहा गया था: "उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।"

बुधवार, 9 जनवरी 2019

राज्य-गान (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर



  • (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर

  •  
  • I
  • इस अपूर्व लम्हे में, हर्ष के समय में,
  • ज़मीं पर और आसमाँ में कर रहे यशगान सब।
  • है कौन न जो उत्साहित हो? है कौन न जो आनंदित हो?
  • इस अवसर पर किसके न आँसू छलकें?
  • ये स्वर्ग नहीं जो पहले था, ये स्वर्ग है राज्य का।
  • ये धरा नहीं जो पहले थी, ये निर्मलता की धरती है।
  • घनघोर बारिश पड़ने के बाद, जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया,
  • जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया।

रविवार, 6 जनवरी 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है



  •  
  • I
  • प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह,
  • सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सम्मुख सबके।
  • हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह;
  • स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो।
  • जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी।
  • परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका, स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके।
  • सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके।

सोमवार, 24 दिसंबर 2018

सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा



  • सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा

  •  
  • I
  • सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
  • सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
  • सत्य पर संगति नहीं है इंसान को ख़ुश करने के लिये।
  • ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।
  • ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।
  • सत्य की समझ है तुम्हें मगर अमल नहीं करते
  • तो बेकार है सारी समझ।
  • सत्य को पाने का अवसर गँवा दोगे,
  • तुम ख़ुद को बचाए जाने का अवसर गँवा दोगे।
  • कुछ कहते हैं समस्या दूर न होगी सत्य के अमल से।

बुधवार, 19 दिसंबर 2018

स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव



  • स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव

  •  
  • I
  • स्वभाव में बदलाव है प्रकृति में बदलाव।
  • नहीं दिखती प्रकृति किसी के व्यवहार में,
  • इसमें शामिल हैं अर्थ और मोल जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं मूल्य इंसानी जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं आत्मा की गहरी बातें, सार इंसान के अस्तित्व का।

रविवार, 16 दिसंबर 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन



मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन

परमेश्वर में जीवधारियों के प्रति कोई द्वेष नहीं है और वह केवल शैतान को पराजित करना चाहता है। उसके सम्पूर्ण कार्य-चाहे वह ताड़ना हो या न्याय – को शैतान की ओर निर्देशित किया गया है; इसे मानवजाति के उद्धार के लिए सम्पन्न किया जाता है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और इसका एक उद्देश्य है: बिलकुल अन्त तक शैतान के साथ युद्ध करना! और परमेश्वर जब तक शैतान पर विजय प्राप्त ना कर ले वह कभी विश्राम नहीं करेगा! वह विश्राम तभी करेगा जब वह एक बार शैतान को हरा दे।

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो



मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो

आज, यदि आप विजयी बनने और सिद्ध किये जाने का अनुसरण नहीं करते हैं, तो भविष्य में, जब पृथ्वी पर मानवजाति एक सामान्य जीवन व्यतीत करेगी, तो ऐसे अनुसरण के लिए कोई अवसर नहीं होगा। उस समय, हर किस्म के व्यक्ति के अन्त को प्रकट कर दिया जाएगा। उस समय, यह स्पष्ट हो जाएगा की आप किस प्रकार के प्राणी हैं, और यदि आप विजयी होने की इच्छा करते हैं या सिद्ध बनने की इच्छा करते हैं तो यह असंभव होगा। यह केवल ऐसा है कि प्रगट किये जाने के पश्चात् मनुष्य के विद्रोहीपन के कारण उसे दण्ड दिया जाएगा।

गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक



मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक

पौलुस के द्वारा किए गए कार्य को मनुष्य के सामने प्रदर्शित किया गया था, किन्तु परमेश्वर के लिए उसका प्रेम कितना शुद्ध था, उसके हृदय की गहराई में परमेश्वर के लिए उसका प्रेम कितना अधिक था—इन्हें मनुष्य के द्वारा देखा नहीं जा सकता है। मनुष्य केवल उस कार्य को देख सकता है जिसे उसने किया था, जिससे मनुष्य जान जाता है उसे निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के द्वारा उपयोग किया गया था, और इस प्रकार मनुष्य सोचता है कि पौलुस पतरस की अपेक्षा बेहतर था, यह कि उसका कार्य अधिक बड़ा था, क्योंकि वह कलीसियाओं की आपूर्ति करने में सक्षम था। पतरस ने केवल अपने व्यक्तिगत अनुभवों को ही देखा था, और अपने कभी कभार के कार्य के दौरान सिर्फ थोड़े से ही लोगों को अर्जित किया था।

बुधवार, 12 दिसंबर 2018

सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक



सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक

अधिकांश लोग अपनी भविष्य की नियति के लिए, या अल्पकालिक आनन्द के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं। क्योंकि ऐसे लोग जो किसी व्यवहार से होकर नहीं गुज़रे हैं, परमेश्वर में उनका विश्वास स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए, एवं प्रतिफल अर्जित करने के लिए होता है। यह सिद्ध किए जाने के लिए, या परमेश्वर के किसी प्राणी के कर्तव्य को निभाने के लिए नहीं होता है। कहने का तात्पर्य है कि अधिकांश लोग अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए, या अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए परमेश्वर में विश्वास नहीं करते हैं।

रविवार, 2 दिसंबर 2018

धन्य हैं वे सचमुच जिन्हें परमेश्वर से प्रेम है



  • धन्य हैं वे सचमुच जिन्हें परमेश्वर से प्रेम है

  •  
  • I
  • धन्य हैं वे, धन्य हैं वे जिन्हें परमेश्वर से प्रेम है,
  • वे मानकर परमेश्वर को महान, करते हैं उसका सम्मान,
  • करते हैं आराधना में नमन उसको।
  • बंधन जगत के हो जाते हैं दरकिनार,
  • मन उनके हो जाते हैं आज़ाद।
  • दर्द और मुश्किलों में परमेश्वर का वचन है रहबर उनका,
  • उनके दिलों में सुकून है, ले सकते हैं सहारा इसका।

शनिवार, 17 नवंबर 2018

विजेता हैं वे जो परमेश्वर की शानदार गवाही दें

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • विजेता हैं वे जो परमेश्वर की शानदार गवाही दें

  •  
  • I
  • परमेश्वर में आस्था के लिये फरमाबरदारी चाहिये,
  • परमेश्वर के कार्य का अनुभव चाहिये।
  • बहुत कार्य किया है परमेश्वर ने;
  • पूर्णता है, शुद्धिकरण है, ताड़ना है उसका काम,
  • इंसान की अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं है उसका काम,
  • परमेश्वर के कठोर वचनों का इंसान लेता है अनुभव।
  • परमेश्वर आता है जब,
  • तो लेना चाहिये इंसान को उसके रोष और प्रताप का आनंद।
  • हालाँकि कठोर हैं उसके वचन, बचाता है, पूर्ण करता है वो इंसान को।

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  • परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  •  
  • I
  • इम्तहानों के वक्त कमज़ोर हो सकता है इन्सान,
  • आ सकते हैं मन में उसके गलत ख़्याल।
  • परमेश्वर की इच्छा को लेकर हो सकता है स्पष्टता का अभाव उसमें,
  • या कौन-सा मार्ग बेहतरीन है अमल वो जिस पर करे।
  • मगर अय्यूब की तरह होनी चाहिये परमेश्वर के कार्य में आस्था तुम्हारी,
  • कमज़ोर था वो, कोसा अपने जन्म के दिन को उसने,
  • मगर नकारा नहीं उसने कि देता है सबकुछ परमेश्वर,
  • कि ले भी लेता है सबकुछ परमेश्वर।

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

यातनाओं के दौरान सिर्फ़ विजयी लोग अडिग रहते हैं

  • यातनाओं के दौरान सिर्फ़ विजयी लोग अडिग रहते हैं

  •  
  • I
  • राज्य के युग में,
  • मानवता हो जाएगी पूरी,
  • राज्य के युग में हो जाएगी पूरी तरह से पूर्ण।
  • जब विजय का काम हो जाएगा पूरा,
  • तो गुज़रेंगे वे शुद्धिकरण और यातना से,
  • जब विजय हो जाएगी पूरी।
  • जो होंगे विजयी,
  • इस यातना से गुज़रकर देंगे जो गवाही,
  • वही हैं जो अंत में
  • किए जाएंगे पूर्ण, बनेंगे वही विजयी।

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

आओ सिय्योन में लेकर यशगान

  • आओ सिय्योन में लेकर यशगान

  •  
  • I
  • आओ सिय्योन में लेकर यशगान।
  • पहले ही प्रकट हो चुका है परमेश्वर का धाम।
  • आओ सिय्योन में लेकर यशगान।
  • करते उसके पवित्र नाम का सब गुणगान; ये फैल रहा है।
  • सर्वशक्तिमान परमेश्वर! सारे जहाँ का मालिक, आख़िरी मसीह,
  • चमकता-दमकता सूरज हमारा,
  • उदित हुआ सबसे भव्य पर्वत सिय्योन पर। सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

आध्यात्मिक युद्ध में परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए 3 अचूक तरीके

आध्यात्मिक युद्ध में परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए 3 अचूक तरीके जिनशिंग, दक्षिणी कोरिया भाइयो और बहनो, आप सबको प्रभु की शांति मिले! अ...