- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- देहधारी परमेश्वर को बेहद चिंता है अपने अनुयायियों की
- I
- परमेश्वर ने देह बनकर, इंसानों के बीच रहकर,
- देखी उनकी बुराई, और हालात ज़िंदगी के।
- देहधारी परमेश्वर ने महसूस कीं इंसान की मजबूरियां,
- इंसान की दयनीयता, इंसान का दुख-दर्द।
- देह में परमेश्वर अपने सहज-ज्ञान से, हो गये ज़्यादा दयालु
- मानव की हालत के लिये, हो गये ज़्यादा चिंतित अपने भक्तों के लिये।
- अपने भक्तों के लिये।
- अपने भक्तों के लिये।
- II
- प्रभु जिनका प्रबंधन करना और जिनको बचाना चाहते हैं,
- क्योंकि अपने दिल में वो, उनको बहुत चाहते हैं।
- उनके लिये वो ही सबसे ऊपर हैं।
- प्रभु ने बड़ी कीमत चुकाई है।
- कपट भोगा है और चोट खाई है।
- मगर हारते नहीं हैं परमेश्वर, काम करते हैं निरंतर,
- ना कोई शिकवा, ना पछतावा कोई।
- देह में परमेश्वर अपने सहज-ज्ञान से, हो गये ज़्यादा दयालु
- मानव की हालत के लिये, हो गये ज़्यादा चिंतित अपने भक्तों के लिये।
- अपने भक्तों के लिये।
- अपने भक्तों के लिये।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-मसीही गीत
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