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मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

आराधना के गी-विजय कार्य का अंदरूनी अभिप्राय



  • विजय कार्य का अंदरूनी अभिप्राय

  •  
  • I
  • लौटना परमेश्वर के पास फिर से, हैं इंसान की जीत के अंदरूनी मायने।
  • त्याग कर शैतान को पूरी तरह लौटना है पास परमेश्वर के, इंसान को।
  • है यही पूरी तरह इंसान का उद्धार। मुश्किलों भरी जीत है जंग आखिरी।
  • आख़िरी पड़ाव है ये परमेश्वर के विजय-लक्ष्य का।
  • बच नहीं सकता बिना इसके कोई इंसान, जीता जा नहीं सकता है शैतान,
  • लक्ष्य बेहतर पा नहीं सकता कोई इंसान।
  • शैतान के पंजे में है हर कोई इंसान।
  • है ज़रूरी पहले हार हो शैतान की, ताकि फिर इंसानों का उद्धार हो।
  • क्योंकि हर काम परमेश्वर का है इंसान की ख़ातिर।
  • II
  • जीत आखिरी लाए उद्धार, और प्रकाशित करे मंज़िल को।
  • इंसान पश्चाताप करता, न्याय हो जाने के बाद, चल पड़ता है सही राह पर।
  • जाग जायेंगे ह्रदय उनके भी जो कि सुन्न हैं।
  • होगा उनका फ़ैसला जो हैं हठीले, अंदरूनी द्रोह खुलकर आयेगा।
  • जो मगर इंसान ना पछतायेगा, धर्मिता की राह पर ना आयेगा,
  • और ना छोड़ेगा जो दोष अपने,
  • उसकी ना मुक्ति है, ना उद्धार है, उसको शैतान निगल जायेगा।
  • है यही मकसद परमेश्वर की जीत का--इंसान को बचाना और उसका अंत दिखलाना,
  • है भला या कि बुरा है, जीत में परमेश्वर की, पता चल जायेगा।
  • लौटना परमेश्वर के पास फिर से, हैं इंसान की जीत के अंदरूनी मायने।
  • त्याग कर शैतान को पूरी तरह लौटना है पास परमेश्वर के, इंसान को।
  • (इंसान को, इंसान को, इंसान को। )
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-सुसमाचारीय संगीत

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