- एक निर्मित प्राणी के दिल की आवाज़
- I
- मैंने चाहा रोना, कोई जगह नहीं थी सही।
- मैंने चाहा गाना, मिला नहीं कोई गीत।
- मैंने चाहा एक निर्मित प्राणी के प्रेम का करना इज़हार।
- ऊपर-नीचे ढूंढा, पर कोई वचन न बता पाए,
- न बता पाए मुझे होता जो महसूस।
- व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
- स्तुति में आपकी मैं उठाऊँ अपने हाथ,
- हूँ ख़ुश कि आप आए इस दुनिया में, इस दुनिया में,
- इस दुनिया में, इस दुनिया में।
- II
- परमेश्वर ने बनाया इंसान और करता है उसे इतना प्यार
- कि देहधारण किया उसने फिर,
- बुरा और अच्छा, विपत्ति और दुख सब सहा,
- हमें बचाया और ले आए हमें इस ख़ूबसूरत जगह में।
- हम करेंगे आपका शुक्रिया हमेशा।
- व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
- दूषित था मैं, पर बचाया आपने!
- कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
- कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
- कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना, आपकी आराधना?
- III
- निर्मित हर प्राणी को करनी चाहिए परमेश्वर की आराधना,
- क्योंकि इस कर्तव्य से वह बाध्य।
- शैतान मुस्कुरा के देता है मुझे सुख का आशिष,
- लेकिन मुझे है नफ़रत और घृणा उससे।
- मुझे तो परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में रहकर करना है उसे प्रेम,
- मुझे तो देह के सुख की हवस नहीं करनी,
- मुझे तो शैतान के प्रभाव में नहीं अब रहना।
- व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर, आप ही हो मेरे भीतर के प्रेम।
- मैं आया हूँ धूल से, मेरा सर्वोत्तम आशीष है करना आपको प्रेम।
- व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर, आप ही हो मेरे भीतर के प्रेम।
- मैं आया हूँ धूल से, मेरा सर्वोत्तम आशीष है करना आपको प्रेम, आपको प्रेम।
- "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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