- और गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ मैं परमेश्वर को
- I
- मेरे दिल को पिघला देता है परमेश्वर का प्रेम,
- मेरी ग़लत धारणाओं को निर्मल कर देता है परमेश्वर का प्रेम।
- उसके दिल को, उसके प्रबल प्रेम को समझता हूँ मैं।
- अब से कभी शिकायत नहीं करूँगा मैं;
- सारा खोया प्रेम पा गया हूँ फिर से मैं।
- मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
- उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
- II
- सीमा है मेरे प्रेम की, पर असीम है प्रेम उसका।
- इस मलिन जगत में वो आया है पूर्ण करने इंसान को,
- दे रहा है अनंत जीवन का मार्ग इंसान को।
- देता है वो अपना दिलो-दिमाग़ इंसान को।
- बेशकीमती और महान है प्रेम उसका।
- मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
- उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
- III
- मैं केवल परमेश्वर को प्रेम करने का अपना फ़र्ज़ निभाना चाहता हूँ,
- उसके दिल को सुकून देने की ख़ातिर
- सत्य का अनुसरण करना चाहता हूँ।
- परमेश्वर की करुणा और प्रेम को मैं थामे रहूँगा;
- उसके उपदेशों और योजना पर मैं ग़ौर करूँगा।
- मुश्किलें, इम्तहान कोई बड़ी बात नहीं हैं;
- चाहे तूफ़ान आए फिर भी मैं उसे प्रेम करूँगा।
- ज़मीर से नहीं आता परमेश्वर के लिये मेरा प्रेम;
- इम्तहानों से गुज़रे बिना, नहीं होगा कोई सच्चा प्रेम।
- तहे-दिल से प्रेम करता हूँ अपने परमेश्वर को मैं।
- शपथ लेता हूँ कभी उससे जुदा नहीं होऊँगा मैं।
- कितना असली और सच्चा है प्रेम उसका।
- सब-कुछ त्याग दूँ तो भी मैं हकदार नहीं इसका।
- मैं पूरी तरह से, अधिक गहराई से उसे प्रेम करना चाहता हूँ।
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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