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गुरुवार, 7 मार्च 2019

आराधना के गी-और गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ मैं परमेश्वर को



  • और गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ मैं परमेश्वर को

  •  
  • I
  • मेरे दिल को पिघला देता है परमेश्वर का प्रेम,
  • मेरी ग़लत धारणाओं को निर्मल कर देता है परमेश्वर का प्रेम।
  • उसके दिल को, उसके प्रबल प्रेम को समझता हूँ मैं।
  • अब से कभी शिकायत नहीं करूँगा मैं;
  • सारा खोया प्रेम पा गया हूँ फिर से मैं।
  • मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
  • उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
  • II
  • सीमा है मेरे प्रेम की, पर असीम है प्रेम उसका।
  • इस मलिन जगत में वो आया है पूर्ण करने इंसान को,
  • दे रहा है अनंत जीवन का मार्ग इंसान को।
  • देता है वो अपना दिलो-दिमाग़ इंसान को।
  • बेशकीमती और महान है प्रेम उसका।
  • मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
  • उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
  • III
  • मैं केवल परमेश्वर को प्रेम करने का अपना फ़र्ज़ निभाना चाहता हूँ,
  • उसके दिल को सुकून देने की ख़ातिर
  • सत्य का अनुसरण करना चाहता हूँ।
  • परमेश्वर की करुणा और प्रेम को मैं थामे रहूँगा;
  • उसके उपदेशों और योजना पर मैं ग़ौर करूँगा।
  • मुश्किलें, इम्तहान कोई बड़ी बात नहीं हैं;
  • चाहे तूफ़ान आए फिर भी मैं उसे प्रेम करूँगा।
  • ज़मीर से नहीं आता परमेश्वर के लिये मेरा प्रेम;
  • इम्तहानों से गुज़रे बिना, नहीं होगा कोई सच्चा प्रेम।
  • तहे-दिल से प्रेम करता हूँ अपने परमेश्वर को मैं।
  • शपथ लेता हूँ कभी उससे जुदा नहीं होऊँगा मैं।
  • कितना असली और सच्चा है प्रेम उसका।
  • सब-कुछ त्याग दूँ तो भी मैं हकदार नहीं इसका।
  • मैं पूरी तरह से, अधिक गहराई से उसे प्रेम करना चाहता हूँ।
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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