- यहाँ का आसमान है कितना नीला
- I
- यहाँ है एक आसमां, कितना अलग है ये आसमां!
- खूबसूरत महक से भीगी है ये धरा,
- और कितनी साफ़ है ये हवा।
- सर्वशक्तिमान परमेश्वर देहधारण कर हमारे बीच रहता है,
- सत्य व्यक्त करता, अंत के दिनों का न्याय शुरू करता है।
- परमेश्वर के वचन हमारी भ्रष्टता का सत्य प्रकट करते हैं।
- इम्तहान और शोधन शुद्ध करते और बचाते हैं हमें, बचाते हैं हमें।
- II
- अपना नज़रिया बदलते हुए, पुराने के बदले नया लेते हुए,
- अपनी भ्रष्ट ज़िन्दगानी को हम अलविदा कहते हैं।
- नियमानुसार हम बोलते, काम करते,
- परमेश्वर के वचन हम पर शासन करते हैं।
- परमेश्वर के प्रेम की ज्योति हमारे दिलों में जलती है।
- परमेश्वर के वचनों को फैलाते, उसकी गवाही देते हैं,
- और राज्य के सुसमाचार की घोषणा करते हैं हम।
- परमेश्वर को संतुष्ट करने वास्ते, भेंट करते जो भी हैं हम,
- और अधिक दुःख सहने को भी हैं तैयार हम।
- हमारा भाग्य बदलने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर का शुक्रिया।
- नये नवेले कल का स्वागत करते, नया जीवन जीते हैं हम!
- परमेश्वर के वचन उसकी शक्ति प्रकट करते हैं,
- जीतते और विजेता बनाते हैं।
- परमेश्वर के चुने जन वापस आते हैं,
- सभी देशों से उसके सामने आते हैं।
- परमेश्वर के जन जीते हैं उसके संग,
- सदा उसकी आराधना और स्तुति करते हैं।
- परमेश्वर की इच्छा पूरी होती है,
- मसीह का राज्य धरती पर साकार होता है।
- परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता प्रकट होती है,
- स्वर्ग और धरा नये बनते हैं।
- राज्य के लोग, परमेश्वर का भय मानते हुए,
- बुराई से दूर होकर उजाले में जीते हैं।
- III
- सब भाई बहन जब मिलते हैं,
- उनके चेहरे पर ख़ुशी झलकती है।
- परमेश्वर के वचनों को पढ़ते, सत्य साझा करते हैं हम,
- परमेश्वर के प्रेम में एक हैं हम।
- नहीं कोई पक्षपात हमारे बीच, निर्मल, साफ़दिल, सच्चे लोग हैं हम।
- एक दूसरे से प्रेम करते हुए, सत्य के अनुसार जीते हैं हम,
- एक दूसरे की ताकतों से सीखते भी हैं हम।
- अपनी गलतियों का प्रायश्चित करते हैं हम,
- एक साथ अपनी भक्ति चढ़ाते, कर्तव्य पूरा करते हैं हम।
- राज्य की राह पर,
- सारी मुसीबतों में अगुआई करते हैं परमेश्वर के वचन।
- परमेश्वर के वचन उसकी शक्ति प्रकट करते हैं,
- जीतते और विजेता बनाते हैं।
- परमेश्वर के चुने जन वापस आते हैं,
- सभी देशों से उसके सामने आते हैं।
- परमेश्वर के जन जीते हैं उसके संग,
- सदा उसकी आराधना और स्तुति करते हैं।
- परमेश्वर की इच्छा पूरी होती है,
- मसीह का राज्य धरती पर साकार होता है।
- परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता प्रकट होती है,
- स्वर्ग और धरा नये बनते हैं।
- राज्य के लोग, परमेश्वर का भय मानते हुए,
- बुराई से दूर होकर उजाले में जीते हैं।
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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