- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- बचाएगा जिन्हें परमेश्वर, विशिष्ट हैं वे उसके दिल में
- I
- सभी चीज़ों में,
- मनुष्य का उद्धार परमेश्वर का सबसे बड़ा काम है।
- वह करता है हर कार्य मानव जाति के लिए,
- न सिर्फ शब्दों और विचारों के साथ,
- एक उद्देश्य, योजना और इच्छा के साथ।
- परमेश्वर और मनुष्य दोनों के लिए
- महत्वपूर्ण है मानवजाति के उद्धार का यह कार्य।
- परमेश्वर कितना व्यस्त है और कितने प्रयास करता है।
- वह करता है अपने काम का प्रबंध और शासन सभी लोगों और चीज़ों पर।
- इतनी बड़ी कीमत पर जो पहले कभी नहीं देखी।
- अपने कार्यों में धीरे धीरे मनुष्य को करता है उजागर
- परमेश्वर का स्वरुप है क्या,
- और परमेश्वर है क्या परमेश्वर की बुद्धि, उसका सामर्थ्य,
- उसका स्वभाव और मूल्य जिसका भुगतान उसने किया।
- भले ही कार्य हो कितना कठिन भले ही बाधाएं हों अपार,
- भले ही मनुष्य हो कितना ही अवज्ञाकारी या कमज़ोर,
- परमेश्वर को कुछ भी रोक नहीं सकता, कुछ भी नहीं कठिन,
- कुछ भी नहीं कठिन।
- II
- कितना करीब है परमेश्वर और कितनी आत्मीयता है,
- उनके साथ जिन्हें उसने प्रबंध और बचाव के लिए चुना है।
- सिवाय उनके न और किसी के साथ
- परमेश्वर की इतनी आत्मीयता रही है।
- उसके हृदय में, वे सब से महत्वपूर्ण हैं,
- और वो सब से बढ़कर उन्हें मूल्य देता है।
- कितनी ही परमेश्वर को चोट पहुँचाई हो,
- या उसकी नाफ़र्मानी की हो।
- भले ही परमेश्वर ने बड़ी कीमत चुकाई हो फिर भी,
- बिना किसी अफ़सोस या शिकायत के,
- बिना थके करता है परमेश्वर अपना कार्य, यह जानकर,
- एक दिन द्रवित होंगे लोग उसके वचन सुनकर।
- मनुष्य एक ना एक दिन उस की पुकार के प्रति हो जाएँगे जागरूक
- यह पहचानेंगे कि वह सृष्टि का प्रभु है,
- और आएंगे उसके पक्ष में वापस।
- भले ही कार्य हो कितना कठिन भले ही बाधाएं हों अपार,
- भले ही मनुष्य हो कितना ही अवज्ञाकारी या कमज़ोर,
- परमेश्वर को कुछ भी रोक नहीं सकता, कुछ भी नहीं कठिन,
- कुछ भी नहीं कठिन।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन
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