- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर तुम्हारे हृदय और रूह को खोज रहा
- I
- मानव, जिन्होंने त्यागा है सर्वशक्तिमान का दिया जीवन,
- अस्तित्व में क्यों वे हैं जानें ना, फिर भी डरते हैं मृत्यु से।
- न कोई सहारा, न मदद,
- फिर भी मानव आँखों को बंद करने में अनिच्छुक है,
- ज़ुर्रत कर, दिखाता है एक अशोभनीय अस्तित्व, इस जहां में,
- बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में।
- जीते हो तुम आशा के बिन।
- जैसे जीता है वो लक्ष्य के बिन।
- रिवायत में एक ही बस पवित्र जन है,
- रिवायत में एक ही बस पवित्र जन है,
- आएगा जो बचाने उन्हें रोएं जो कष्ट से
- और हताश हो तड़पते हैं उसके आगमन के लिए।
- इन लोगों में जो हैं अभी अचेत,
- यह विश्वास नहीं है जगाया जा सकता।
- फिर भी लोगों में इसे प्राप्त करने की इच्छा है।
- II
- सर्वशक्तिमान को है करुणा उनपे जो पीड़ा में हैं।
- और साथ ही वो ऊब चुका है इनसे जो हैं बेहोश,
- क्योंकि करना होता है उसको बहुत इंतज़ार
- मनुष्य से पाने को जवाब।
- वो चाहता है ढूंढना तुम्हारे दिल और रूह को।
- वो देना चाहता है भोजन और पानी तुम्हें।
- जगाना चाहता है,
- वो तुम्हें ताकि तुम भूखे और प्यासे न रहो।
- और जब तुम थक जाते हो,
- और जब तुम खुद को अकेला पाते हो, अपने इस संसार में,
- न घबराना तुम, न रोना तुम।
- सर्वशक्तिमान ईश्वर,
- किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा।
- III
- निगरानी वो कर रहा, इंतज़ार में तुम्हारे लौटने के।
- तुम्हारे याददाश्त लौटने का इंतज़ार वो कर रहा।
- तुम्हारे जान जाने का कि तुम परमेश्वर से ही आये हो,
- यह सत्य कि आये हो तुम परमेश्वर से ही।
- एक दिन तुम राह खो कर, किसी तरह कहीं पे,
- पड़े थे बेहोश किनारे एक सड़क के,
- और फिर अनजाने में मिला तुमको “पिता”।
- तुम्हें हो एहसास कि सर्वशक्तिमान वहां पहरे पर है।
- इंतज़ार कर रहा है तुम्हारे वापस लौट आने का, एक अरसे से।
- IV
- वो बेहद चाहता है।
- वो करता इंतज़ार प्रत्युत्तर के लिए बिन किसी जवाब के।
- उसका इंतज़ार है अनमोल
- और यह है दिल के लिए, मानव के रूह और दिल के लिए।
- ये इंतज़ार शायद सदा ही रहेगा,
- या शायद ये इंतज़ार अब अंत होने को है।
- पर जानना तुम्हें
- है चाहिए, कहाँ है तुम्हारा दिल और रूह? कहाँ हैं वे?
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें