- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- शरीर त्यागने का अभ्यास
- I
- गर ऐसा कुछ हो जाए जिसमें सहनी पड़ें मुश्किलेंतुझे,
- तो उस वक्त परमेश्वर की इच्छा को समझ और ध्यान में रख।
- ख़ुद को संतुष्ट न कर, ख़ुद को दरकिनार कर।
- शरीर से अधम और कुछ भी नहीं।
- तू परमेश्वर की खोज कर, उसे संतुष्ट कर, और अपना फर्ज़ पूरा कर।
- परमेश्वर लाएगा इस मामले में
- विशेष प्रबुद्धता ऐसे विचारों के संग,
- और मिलेगी तेरे दिल को दिलासा।
- II
- जब तेरे साथ कुछ घटे,
- तो तू ख़ुद को दरकिनार कर,
- शरीर को हर चीज़ से तू अधम मान।
- शरीर को तू जितना संतुष्ट करेगा,
- उतनी ही ज़्यादा ये माँग करेगा, उतनी ही ज़्यादा ये छूट लेगा,
- जितनी ये ख़्वाहिशें करेगा, उतना ही ये ऐयाश बनेगा।
- शरीर उस हद तक जाएगा जहाँ ये
- गहन धारणाएं पालेगा, परमेश्वर की अवज्ञा करेगा,
- ख़ुद को ऊँचा उठाएगा, परमेश्वर के कार्य पर सन्देह करेगा।
- III
- साँप की मानिंद है शरीर इंसान का, ये नुकसान पहुँचाता है ज़िंदगी को।
- जब ये अपनी मनमानी करता है पूरी तरह,
- तो खो बैठते हो तुम ज़िंदगी पर अधिकार अपना।
- शरीर होता है शैतान का।
- फिज़ूल की ख़्वाहिशों के संग ये ख़ुदगर्ज़ होता है,
- चाहता है सुख-सुविधा, आराम, सहूलियत और निष्क्रियता।
- एक हद तक जब हो जाएगा संतुष्ट ये,
- तो आख़िरकार निगल जाएगा तुम्हें भी ये।
- गर ऐसा कुछ हो जाए जिसमें सहनी पड़ें मुश्किलेंतुझे,
- तो उस वक्त परमेश्वर की इच्छा को समझ और ध्यान में रख।
- ख़ुद को संतुष्ट न कर, ख़ुद को दरकिनार कर।
- शरीर से अधम और कुछ भी नहीं।
- तू परमेश्वर की खोज कर, उसे संतुष्ट कर, और अपना फर्ज़ पूरा कर।
- परमेश्वर लाएगा इस मामले में
- विशेष प्रबुद्धता ऐसे विचारों के संग,
- और मिलेगी तेरे दिल को दिलासा।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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