- स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव
- I
- स्वभाव में बदलाव है प्रकृति में बदलाव।
- नहीं दिखती प्रकृति किसी के व्यवहार में,
- इसमें शामिल हैं अर्थ और मोल जीवन के,
- इसमें शामिल हैं मूल्य इंसानी जीवन के,
- इसमें शामिल हैं आत्मा की गहरी बातें, सार इंसान के अस्तित्व का।
- II
- अगर परमेश्वर के कार्य को अनुभव कर,
- सत्य में पूरी तरह प्रवेश कर ले इंसान,
- अगर अपने मूल्य, जीवन के प्रति नज़रिया बदल ले इंसान,
- और परमेश्वर की तरह ही चीज़ों को देखे इंसान,
- अगर परमेश्वर के आगे ख़ुद को झुका सके, समर्पित हो सके इंसान,
- तो स्वभाव से बदल जाएगा इंसान।
- अगर स्वीकार न करे सत्य को इंसान,
- तो इन पहलुओं में उसके नहीं आ सकता बदलाव।
- III
- लोग या चीज़ें चाहे जैसे बदल जाएँ,
- या दुनिया चाहे उलट-पुलट हो जाए,
- अंदर की सच्चाई रहनुमा है तेरी अगर,
- सच्चाई जड़ जमा लेती है तेरे भीतर अगर,
- परमेश्वर के वचन रहनुमाई करते हैं, तेरे जीवन की, हितों की अगर,
- वो रहनुमाई करते हैं तेरे अनुभव की अगर,
- तो सचमुच बदल जाएगा तू,
- तो सचमुच बदल जाएगा तू।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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