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बुधवार, 9 जनवरी 2019

राज्य-गान (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर



  • (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर

  •  
  • I
  • इस अपूर्व लम्हे में, हर्ष के समय में,
  • ज़मीं पर और आसमाँ में कर रहे यशगान सब।
  • है कौन न जो उत्साहित हो? है कौन न जो आनंदित हो?
  • इस अवसर पर किसके न आँसू छलकें?
  • ये स्वर्ग नहीं जो पहले था, ये स्वर्ग है राज्य का।
  • ये धरा नहीं जो पहले थी, ये निर्मलता की धरती है।
  • घनघोर बारिश पड़ने के बाद, जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया,
  • जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया।
  • II
  • पर्वत, पानी हैं बदल रहे...
  • बदल रहा है मानव भी, सारी सृष्टि भी बदल रही...
  • ओ नीरव पर्वत, उठो और परमेश्वर की ख़ातिर नृत्य करो।
  • ओ ठहरे जल, बहते जाओ!
  • ओ सपनों में खोए मानव, उठो लक्ष्य में लग जाओ!
  • आया है परमेश्वर... राजा है परमेश्वर...
  • ख़ुद अपनी आँखों से तुम, दर्शन परमेश्वर के कर लो,
  • ख़ुद अपने कानों से तुम, वाणी परमेश्वर की सुन लो,
  • और राज्य के जीवन को तुम ख़ुद जी लो।
  • कितना अद्भुत, है कितना मधुर... जिसको न भुलाया जा सकता...
  • कितना अद्भुत, है कितना मधुर... जिसको न भुलाया जा सकता...
  • III
  • परमेश्वर के दहकते क्रोध में, कसमसाता है बड़ा लाल अजगर।
  • प्रतापी न्याय में परमेश्वर के, नज़र आता है शैतान का असली चेहरा।
  • परमेश्वर के कठोर वचनों पर,
  • होता शर्मिंदा इंसान बहुत, न जाने छिपाए चेहरा किधर।
  • पहले मानव परमेश्वर का, करता था तिरस्कार और उपहास,
  • हर समय बहुत इतराता था,
  • हर पल उल्लंघन करता था वो परमेश्वर की आज्ञा का।
  • अब देखो आज फिर, कौन है जो न बहाता आँसू?
  • है कौन जो ख़ुद को न इल्ज़ाम देता?
  • इस पूरी कायनात में, हर कोई आंसू बहा रहा,
  • हर कोई ख़ुशी से चहक रहा, सबके लफ़्ज़ों में हँसी भरी,
  • अनंत हर्षोन्माद है... सबके लफ़्ज़ों में हँसी भरी, अनंत हर्षोन्माद है...
  • IV
  • हल्की बारिश की टपटप है; भारी हिमपात की धड़कन है...
  • आसमान में बढ़े जा रहे, बादल कितनी तेज़ी से।
  • धरती के महासागरों में, लहरें उठती हैं, गिरती हैं।
  • ग़म और ख़ुशी से मानव भी अभिभूत है।
  • कुछ हँसते हैं आनंद में, कुछ बहा रहे आँसू अपने,
  • कुछ चिल्लाते हैं ख़ुशियों से।
  • हर कोई जैसे भूल गया। क्या ये वसंत की फुहार वाला दिन है?
  • या ग्रीष्म का खिलता दिन है? या ये पकी फसल का पतझड़ वाला दिन है?
  • या ये ठिठुरती सर्दी वाला दिन है? ये कोई नहीं बतला सकता...
  • परमेश्वर की सन्तानें नृत्य खुशी से करती हैं;
  • परमेश्वर के जन सारे खुश होकर उछल-कूद करते।
  • अपने कामों में लगे हुए हैं देवदूत, वो कर रहे चरवाही हैं...
  • मानव धरती पर व्यस्त बहुत ही कामों में,
  • और धरती पर बढ़ती जीवों की आबादी,
  • और धरती पर बढ़ती जीवों की आबादी।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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