- गरिमामय है सार परमेश्वर का
- I
- परमेश्वर के सार का है एक हिस्सा प्यार, उसकी दया मिलती है सबको,
- भूल जाते हैं लोग मगर, उसका एक हिस्सा गरिमा भी है।
- परमेश्वर में प्यार है, मगर ये मायने नहीं इसके
- कि ठेस पहुँचाई जा सकती है उसे,
- और महसूस न हो उसे या प्रतिक्रिया न हो उसकी।
- परमेश्वर को परिभाषित करने की ख़ातिर,
- इंसानी कल्पनाओं का सहारा न ले,
- न थोप अपनी ख़्वाहिश उस पर,
- और जिस तरह पेश आता है वो इंसानों से, इंसानों से,
- उसमें इंसानी तौर-तरीके अपनाए वो,
- इसकी ख़ातिर मजबूर न कर उसको।
- II
- उसकी दया के ये मायने नहीं कि वो जैसे पेश आता है अपने लोगों से,
- उसमें उसके कोई उसूल नहीं।
- ज़िंदा है परमेश्वर, हाँ, सचमुच मौजूद है वो।
- कोई कठपुतली या कुछ और नहीं है वो।
- परमेश्वर को परिभाषित करने की ख़ातिर,
- इंसानी कल्पनाओं का सहारा न ले,
- न थोप अपनी ख़्वाहिश उस पर,
- और जिस तरह पेश आता है वो इंसानों से, इंसानों से,
- उसमें इंसानी तौर-तरीके अपनाए वो,
- इसकी ख़ातिर मजबूर न कर उसको।
- ऐसा करके परमेश्वर को गुस्सा दिला रहा है तू,
- उसके क्रोध को बुलावा दे रहा है तू।
- परमेश्वर की गरिमा को चुनौती दे रहा है तू।
- III
- सुननी चाहिये हमें उसके दिल की आवाज़, चूँकि मौजूद है वो,
- उसके मनोभाव पर गौर करना चाहिये हमें,
- उसकी भावना को समझना चाहिये हमें।
- परमेश्वर को परिभाषित करने की ख़ातिर,
- इंसानी कल्पनाओं का सहारा न ले,
- न थोप अपनी ख़्वाहिश उस पर,
- और जिस तरह पेश आता है वो इंसानों से, इंसानों से,
- उसमें इंसानी तौर-तरीके अपनाए वो,
- इसकी ख़ातिर मजबूर न कर उसको।
- ऐसा करके परमेश्वर को गुस्सा दिला रहा है तू,
- उसके क्रोध को बुलावा दे रहा है तू।
- परमेश्वर की गरिमा को चुनौती दे रहा है तू।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-मसीही गीत
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