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शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

आराधना के गी-परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट रही है सभी के लिए



  • परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए
  •  
  • I
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  • II
  • परमेश्वर ने जानकर अपना सार छुपाया नहीं कभी,
  • न अपना स्वभाव, न इच्छा ही।
  • चूँकि इन्सान नहीं देता उसके कार्य, इच्छा पर ध्यान,
  • इन्सान की परमेश्वर के बारे में समझ है अति कमज़ोर।
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  • III
  • मायने हैं इसके कि जब परमेश्वर अपना व्यक्तित्व छुपाता है,
  • वो इन्सान के साथ ही हर समय खड़ा रहता है,
  • हर पल अपनी इच्छा, स्वभाव और सार प्रकट करता है।
  • एक अर्थ में, परमेश्वर का व्यक्तित्व सबके लिए खुला है।
  • चूँकि इन्सान अनाज्ञाकारी और अँधा है,
  • परमेश्वर के प्रकटन को वो देख नहीं पाता है,
  • परमेश्वर के प्रकटन को देख नहीं पाता है।
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से

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