- आराधना गीत
- चल रहा हूँ पथ पर राज्य की ओर मैं
- I
- चल रहा हूँ राज्य की ओर,
- पढ़ रहा हूँ वचन परमेश्वर के, करता हूँ मैं आदर उनका।
- ओह, इतने सार्थक वचन,
- बेहद सच्चे, नक्श हो गये दिल पर मेरे।
- हे परमेश्वर, फ़िक्र है तुम्हें,
- कहीं धोखा न दे दे, टुकड़े न कर दे शैतान मेरे।
- राह दिखाई तुम्हारे वचनों ने मुझे,
- सच्चा जीवन दिया, इस पथ पर पहुँचाया मुझे।
- II
- तुम्हारे वचनों के काम से,
- देखी है इस जगत की बुराई और अंधेरा मैंने।
- दुष्ट चलन से त्रस्त हूँ मैं,
- कोई इंसानी समानता नहीं है मुझमें।
- भटकता था जगत में,
- नाउम्मीद में, दिल में अंधेरा लिये।
- तुम्हीं थे मुझे बचाया जिसने!
- तुम्हारे वचनों में लिपटा, बढ़ा, मज़बूत हुआ मैं।
- III
- प्रकट करते हैं वचन परमेश्वर के सत्य,
- भ्रष्टता और कुरूपता मेरी।
- ख़ुदगर्ज़, लालची, अहंकारी,
- झूठ से ग्रसित, लगभग अमानुषी!
- गिरता हूँ परमेश्वर के कदमों में,
- पश्चाताप में डूबा, होता हूँ समर्पित उसके न्याय को।
- सत्य की खोज का,
- परमेश्वर के वचनों पर अमल का,
- और इंसान के समान जीने का संकल्प करता हूँ।
- IV
- राज्य की ओर चल रहा हूँ,
- ख़ुश हूँ मैं, सुसमाचार साझा कर रहा हूँ।
- कितना मुश्किल है चलना इस राह पर,
- ज़ुल्म बढ़ते जाते हैं दिन-ब-दिन!
- एक कदम न चल सका मैं।
- राह दिखाते हैं, विश्वास और हौसला देते हैं मुझे, वचन परमेश्वर के।
- अंत तक करूँगा अनुसरण परमेश्वर का मैं,
- पाकर अनुमोदन परमेश्वर से, ख़ुशी-ख़ुशी मर जाऊँगा मैं।
- पाकर अनुमोदन परमेश्वर से, ख़ुशी-ख़ुशी मर जाऊँगा मैं।
- स्रोत:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-सुसमाचारीय संगीत
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