- आराधना गीत
- हे प्रभु, कहाँ हो तुम?
- I
- हे प्रभु, फ़रीसियों के अधीन, जी रहे हैं हम,
- उन्हीं के काबू में हैं, उनके जाल में फॅसे हैं हम।
- सुनते हैं बोलते हैं बाइबल का ज्ञान, हर रोज़ हम।
- समझ न पाएं परमेश्वर के वचन, अमल में लाएं कैसे,
- बस उन्हीं रस्मों में जी रहे हैं हम।
- परमेश्वर का हुकुम मान नहीं पाते हैं,
- क्या है उसका आज्ञापालन, क्या है उसकी इच्छा पालन,
- हम समझ नहीं पाते हैं।
- भले ही मानता हूं मैं प्रभु को,
- पूजता और मानता पर इंसान को हूँ,
- परमेश्वर के काम से, स्वभाव से अनजान हूँ पूरी तरह।
- अंधकार में पड़ा हूँ,
- परमेश्वर की आस्था के अर्थ सारे खो चुका हूँ।
- II
- हे प्रभु, डालो मुझ पर रोशनी तुम्हारी,
- ताकि मैं समझ पाऊं इच्छा तुम्हारी।
- निकल सकता हूं फिर मैं अंधेरों से,
- जाल से, धोखे से फ़रीसियों के,
- और सच में आ सकता हूं, सामने परमेश्वर के।
- बचा लो हे प्रभु मुझको, निकालो इन अंधेरों से,
- बचा लो हे प्रभु मुझको, फ़रीसियों की चालों से।
- कलीसिया क्यों हो गया वीरान इतना?
- कलीसिया क्यों हो गया सुनसान इतना?
- कौन है जो भटक गया है सही राह से,
- और मुझको अंधेरों में पहुँचा दिया है?
- न छोड़ो हाथ मेरा, हे प्रभु मेरे।
- न छोड़ो साथ मेरा, हे प्रभु मेरे।
- मैं तोबा करने को तैयार हूं।
- मैं वापिस आने को तैयार हूं।
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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