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शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

हे प्रभु, कहाँ हो तुम?

  • आराधना गीत
  • हे प्रभु, कहाँ हो तुम?

  •  
  • I
  • हे प्रभु, फ़रीसियों के अधीन, जी रहे हैं हम,
  • उन्हीं के काबू में हैं, उनके जाल में फॅसे हैं हम।
  • सुनते हैं बोलते हैं बाइबल का ज्ञान, हर रोज़ हम।
  • समझ न पाएं परमेश्वर के वचन, अमल में लाएं कैसे,
  • बस उन्हीं रस्मों में जी रहे हैं हम।
  • परमेश्वर का हुकुम मान नहीं पाते हैं,
  • क्या है उसका आज्ञापालन, क्या है उसकी इच्छा पालन,
  • हम समझ नहीं पाते हैं।
  • भले ही मानता हूं मैं प्रभु को,
  • पूजता और मानता पर इंसान को हूँ,
  • परमेश्वर के काम से, स्वभाव से अनजान हूँ पूरी तरह।
  • अंधकार में पड़ा हूँ,
  • परमेश्वर की आस्था के अर्थ सारे खो चुका हूँ।
  • II
  • हे प्रभु, डालो मुझ पर रोशनी तुम्हारी,
  • ताकि मैं समझ पाऊं इच्छा तुम्हारी।
  • निकल सकता हूं फिर मैं अंधेरों से,
  • जाल से, धोखे से फ़रीसियों के,
  • और सच में आ सकता हूं, सामने परमेश्वर के।
  • बचा लो हे प्रभु मुझको, निकालो इन अंधेरों से,
  • बचा लो हे प्रभु मुझको, फ़रीसियों की चालों से।
  • कलीसिया क्यों हो गया वीरान इतना?
  • कलीसिया क्यों हो गया सुनसान इतना?
  • कौन है जो भटक गया है सही राह से,
  • और मुझको अंधेरों में पहुँचा दिया है?
  • न छोड़ो हाथ मेरा, हे प्रभु मेरे।
  • न छोड़ो साथ मेरा, हे प्रभु मेरे।
  • मैं तोबा करने को तैयार हूं।
  • मैं वापिस आने को तैयार हूं।

  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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