- चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार
- I
- परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
- चाहे कैसे भी वो करता है,
- या किसी भी रूप में,
- लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
- है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
- उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
- II
- तुम्हारा उद्धार करने से पहले, परमेश्वर तुम्हें बदलेगा।
- इसके लिए तुम्हें सहना होगा।
- वरना कैसे तुम बचाए जा सकोगे?
- तुम सहोगे बहुत।
- होगा चारों ओर तुम्हारे परमेश्वर
- लोगों, मामलों और चीजों को व्यवस्थित करते हुये,
- या वो तराशेगा और तुम्हें प्रकट करेगा
- और इन सब के द्वारा तुम देखोगे कि तुम सच में कौन हो।
- परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
- चाहे कैसे भी वो करता है,
- या किसी भी रूप में,
- लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
- है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
- उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
- III
- यदि हर बार परमेश्वर तुमसे निपटता है
- और जगाता है लोगों और परिस्थितियों को जो तुम्हें घेरे हुये हैं,
- तुम बेचैनी और उत्साह महसूस करते हो, तब तुम पाओगे कद-काठी,
- और प्रवेश कर सकोगे सत्य के वास्तविकता में।
- पर यदि तुम्हें कुछ एहसास न हो जब वो तुम्हें तराशे,
- न दर्द, न तकलीफ़, तो तुम वाक़ई सुन्न हो।
- यदि तुम उसके पास न आओ, यदि उसकी इच्छा न ढूंढो,
- यदि तुम प्रार्थना न करो या सत्य न ढूंढो, तो तुम वाक़ई सुन्न हो।
- परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
- चाहे कैसे भी वो करता है,
- या किसी भी रूप में,
- लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
- है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
- उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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