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शनिवार, 22 दिसंबर 2018

चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार



  • चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार

  •  
  • I
  • परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
  • चाहे कैसे भी वो करता है,
  • या किसी भी रूप में,
  • लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
  • है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
  • उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
  • II
  • तुम्हारा उद्धार करने से पहले, परमेश्वर तुम्हें बदलेगा।
  • इसके लिए तुम्हें सहना होगा।
  • वरना कैसे तुम बचाए जा सकोगे?
  • तुम सहोगे बहुत।
  • होगा चारों ओर तुम्हारे परमेश्वर
  • लोगों, मामलों और चीजों को व्यवस्थित करते हुये,
  • या वो तराशेगा और तुम्हें प्रकट करेगा
  • और इन सब के द्वारा तुम देखोगे कि तुम सच में कौन हो।
  • परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
  • चाहे कैसे भी वो करता है,
  • या किसी भी रूप में,
  • लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
  • है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
  • उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
  • III
  • यदि हर बार परमेश्वर तुमसे निपटता है
  • और जगाता है लोगों और परिस्थितियों को जो तुम्हें घेरे हुये हैं,
  • तुम बेचैनी और उत्साह महसूस करते हो, तब तुम पाओगे कद-काठी,
  • और प्रवेश कर सकोगे सत्य के वास्तविकता में।
  • पर यदि तुम्हें कुछ एहसास न हो जब वो तुम्हें तराशे,
  • न दर्द, न तकलीफ़, तो तुम वाक़ई सुन्न हो।
  • यदि तुम उसके पास न आओ, यदि उसकी इच्छा न ढूंढो,
  • यदि तुम प्रार्थना न करो या सत्य न ढूंढो, तो तुम वाक़ई सुन्न हो।
  • परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
  • चाहे कैसे भी वो करता है,
  • या किसी भी रूप में,
  • लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
  • है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
  • उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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