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गुरुवार, 27 जून 2019

प्रभु ने स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की: "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। ये स्पष्ट है कि जब प्रभु लौटेंगे वे अपने वचन बोलेंगे और उच्चारित करेंगे, और वे सभी जो परमेश्वर की आवाज़ सुनते हैं और प्रभु का स्वागत करते हैं परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहित होंगे और आपदा से पहले प्रभु के साथ भोज में शामिल होंगेI

स्वर्गारोहित होने के ख़ास विषय-प्रभु ने स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की: "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। ये स्पष्ट है कि जब प्रभु लौटेंगे वे अपने वचन बोलेंगे और उच्चारित करेंगे, और वे सभी जो परमेश्वर की आवाज़ सुनते हैं और प्रभु का स्वागत करते हैं परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहित होंगे और आपदा से पहले प्रभु के साथ भोज में शामिल होंगेI
संदर्भ के लिए बाइबिल के पद:
"तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (लूका 12:40)।
"मैं चोर के समान आता हूँ" (प्रकाशितवाक्य 16:15)।
"देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)।
"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:7)।
"मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)।

सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग आठ



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग आठ

13. अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है
(लूका 24:30-32) जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से ओझल हो गया। उन्होंने आपस में कहा, "जब वह मार्ग में हमसे बातें करता था और पवित्रशास्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हई?"

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात

अब आओ हम नीचे दिए पवित्र शास्त्र के अंश को पढ़ें
12. अपने पुनरूत्थान के बाद अपने चेलों के लिए यीशु के वचन
(यूहन्ना 20: 26-29) आठ दिन के बाद उसके चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था; और द्वार बंद थे, तब यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा, "तुम्हें शान्ति मिले।" तब उसने थोमा से कहा, "अपनी उँगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल, और अविश्वासी नहीं परंतु विश्वासी हो।" यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, "हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! यीशु ने उससे कहा, तू ने मुझे देखा है, क्या इसलिए विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया।"

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

प्रभु यीशु को जानें-परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग पांच



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग पांच

आगे, आओ हम पवित्र शास्त्र के निम्नलिखित अंश को देखें।
9.यीशु अद्भुत काम करता है।
1) यीशु पाँच हज़ार को भोजन कराता है
(यूहन्ना 6:8-13) उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उससे कहा, "यहाँ एक लड़का है जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो छोटी मछलियाँ हैं; परन्तु इतने लोगों के लिए वे क्या हैं?" यीशु ने कहा, "लोगों को बैठा दो।" उस जगह बहुत घास थी। तब लोग जिनकी संख्या लगभग पाँच हज़ार की थी, बैठ गए। तब यीशु ने रोटियाँ लीं, और धन्यवाद करके बैठने वालों को बाँट दीं; और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बाँट दिया। जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, "बचे हुए टुकड़े बटोर लो कि कुछ फेंका ना जाए।" अत: उन्होंने बटोरा, और जौ की पाँच रोटियों के टुकड़ों से जो खाने वालों से बच रहे थे, बारह टोकरियाँ भरीं।

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग चार



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग चार

आगे, आओ इन निम्नलिखित अंशों को पढ़ें।
6. पहाड़ी उपदेश
1) धन्य वचन (मत्ती 5:3-12)
2) नमक और ज्योति (मत्ती 5:13-16)
3) व्यवस्था (मत्ती 5:17-20)
4) क्रोध (मत्ती 5:21-26)
5) व्यभिचार (मत्ती 5:27-30)
6) तलाक (मत्ती 5:31-32)
7) मन्नतें (मत्ती 5:33-37)
8) आँख के बदले आँख (मत्ती 5:38-42)
9) अपने शत्रुओं से प्रेम करो (मत्ती 5:43-48)
10) देने के विषय निर्देश (मत्ती 6:1-4)
11) प्रार्थना (मत्ती 6:5-8)

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग दो के क्रम में



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग दो के क्रम में

आगे, आओ हम पवित्र शास्त्र के इस अंश के इस अन्तिम वाक्य पर एक नज़र डालें: "मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है।" क्या इस वाक्य का एक व्यावहारिक पहलू है? क्या तुम लोग इसके व्यावहारिक पहलू को देख सकते हो? हर एक बात जो परमेश्वर कहता है उसके हृदय से आती है, तो उसने ऐसा क्यों कहा? तुम लोग इसे कैसे समझते हो? तुम लोग शायद इस वाक्य का अर्थ अब समझते हो, परन्तु उस समय बहुत से लोग नही समझते थे क्योंकि मनुष्यजाति बस उसी समय व्यवस्था के युग से बाहर निकली थी। उनके लिए, सब्त से बाहर निकलना एक कठिन बात थी, और सच्चे सब्त को समझने का तो जिक्र भी नहीं कर सकते थे।

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग दो



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग दो

हमने बस अभी अभी उस समस्त कार्य के बारे में बात की है जिसे परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किया गया था, ऐसी चीज़ों का क्रम जिसे उसने पहली बार किया था। इन चीज़ों में से प्रत्येक परमेश्वर के प्रबन्धकीय योजना, और परमेश्वर की इच्छा से सम्बन्धित है। वे स्वयं परमेश्वर के स्वभाव और उसके सार से सम्बन्धित हैं। यदि हम और अच्छे से जो परमेश्वर के पास है तथा जो परमेश्वर है उसे समझना चाहते हैं, तो हम पुराने नियम या व्यवस्था के युग तक नहीं रूकेंगे, किन्तु हमें उन कदमों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है जिन्हें परमेश्वर ने अपने कार्य के दौरान उठाया था। इस प्रकार, जब परमेश्वर ने व्यवस्था के युग का अन्त किया और अनुग्रह के युग का शुभारम्भ किया है, तो हमारे स्वयं के कदम अनुग्रह के युग में पधार चुके हैं—एक ऐसा युग जो अनुग्रह और छुटकारे से भरपूर है।

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