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शुक्रवार, 7 जून 2019

Hindi Christian Worship Song | परमेश्वर के कार्य फैले हैं ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में


Hindi Christian Worship Song | परमेश्वर के कार्य फैले हैं ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में

परमेश्वर देखता है सब कुछ ऊपर से, सभी चीज़ों पर है प्रभुत्व उसका ऊपर से। साथ ही, पृथ्वी पर भेजा है अपना उद्धार परमेश्वर ने। हर समय परमेश्वर देख रहा है अपने गुप्त स्थान से, इंसान की हर चाल को, हर चीज़ को जो वे कहते और करते हैं। खुली हुई किताब की तरह परमेश्वर जानता है इंसान को। गुप्त स्थान है परमेश्वर का निवास, नभ-मंडल वह बिस्तर है जिस पर वह लेटता है। शैतान की शक्ति पहुंच नहीं सकती परमेश्वर तक, क्योंकि प्रताप, धार्मिकता और न्याय से भरपूर है परमेश्वर।

गुरुवार, 23 मई 2019

मैं हूँ बस एक अदना सृजित प्राणी



  • कलीसिया का भजन
  • मैं हूँ बस एक अदना सृजित प्राणी

  • I
  • हे परमेश्वर! चाहे मेरे पास कोई रुतबा हो न हो,
  • अब मैं ख़ुद को समझता हूँ।
  • यदि मेरा रुतबा ऊँचा है, तो ये ऊँचाई तूने दी है।
  • यदि मेरा रुतबा नीचा है, तो ये विधान तेरा है।
  • हे परमेश्वर! न मेरे पास है विकल्प, ना ही शिकायतें।
  • सब कुछ है तेरे हाथों में।
  • तूने किया तय कि मैं लूँ जन्म
  • इस देश में, इन लोगों के बीच में,
  • और मुझे केवल तेरे प्रभुत्व के अधीन फ़रमाबरदार होना चाहिए।

मंगलवार, 21 मई 2019

Hindi Best Christian Family Movie "कहाँ है घर मेरा?" | God Gave Me a Happy Family (Hindi Dubbed)

Hindi Best Christian Family Movie "कहाँ है घर मेरा?" | God Gave Me a Happy Family (Hindi Dubbed)

वेन्‍या जब दो साल की थी, उसके माता-पिता का तलाक हो गया और उसके बाद वह अपने पिता और सौतेली मां के साथ रही। उसकी सौतेली मां उसे स्‍वीकार नहीं कर पाई और हमेशा उसके पिता के साथ झगड़ा करती रही। उसके पिता के पास वेन्‍या को उसकी मां के घर भेजने के अलावा कोई और चारा न रहा, परंतु उसकी मां अपने कारोबार को चलाने में पूरी तरह व्‍यस्‍त थी और उसके पास वेन्‍या का ध्‍यान रखने के लिए कोई समय नहीं था, इसलिये वह अक्‍सर अपने रिश्‍तेदारों और दोस्‍तों के घर लालन-पालन के लिए धक्‍का खाती रही।

गुरुवार, 16 मई 2019

परमेश्वर का प्रेम सर्वाधिक यथार्थ है

परमेश्वर का प्रेम सर्वाधिक यथार्थ है

वेंझोंग बीजिंग शहर
11 अगस्त 2012
21 जुलाई 2012 की रात को हमारे यहाँ एक भयावह बाढ़ आई थी। इस प्रकार की दुर्घटनाएं कभी कभी ही घटित होती है। मैंने इस दुर्घटना के दौरान क्या अनुभव किया और मैंने क्या देखा; उन सभी लोगों को बताना चाहती हूँ जो लोग परमेश्वर के लिए लालायित रहते हैं।

बुधवार, 15 मई 2019

परमेश्वर के शासन-परमेश्वर ने आपदा से हमारे परिवार की रक्षा की

परमेश्वर के शासन-परमेश्वर ने आपदा से हमारे परिवार की रक्षा की

वैंग लैन, बीजिंग
6 अगस्त, 2012
21 जुलाई 2012 को, साठ वर्षों में सबसे बड़ी बाढ़ ने हमारे गांव को तहस—नहस कर दिया। यह आपदा स्वर्ग से गिरी थी, बाढ़ के पानी में मिट्टी और पत्थर मिश्रित थे एवं इसने पूरे गांव को तबाह कर दिया था। अधिकांश घरों को पानी व कीचड़ के भूस्खलन ने नष्ट कर दिया था।

मंगलवार, 14 मई 2019

पवित्र आत्मा क्या है-आपदाओं के बीच मैंने परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव देखा

पवित्र आत्मा क्या है-आपदाओं के बीच मैंने परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव देखा

ली जिंग, बीजिंग
7 अगस्त, 2017
उस दिन, सुबह से बारिश होना शुरू हो गई थी। मैं एक भाई के घर में सभा में गई थी, इसी दौरान बारिश अधिक से अधिक तेज होती जा रही थी। दोपहर तक यह ऐसे बरसने लगी जैसे सीधे स्वर्ग से ही गिर रही हो। हमारी सभा के खत्म होने के समय तक, बारिश का पानी मेरे भाई के बरामदे में घुस गया था, लेकिन चूंकि मैं अपने परिवार के लिए चिंतित थी, इसलिए मैं अपने घर की ओर जाने के लिए संघर्ष करने लगी।

सोमवार, 13 मई 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे जिंदगी में दूसरा मौका दिया है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे जिंदगी में दूसरा मौका दिया है


दो साधारण भाई व बहन, बीजिंग
15 अगस्त, 2012
मेरे लिए 21 जुलाई 2012 सबसे अविस्मरणीय दिन था, साथ ही साथ मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन भी।
उस दिन, बीजिंग में फांगशान जिले में भारी बारिश हो रही थी, सबसे भारी बारिश जो हमने इकसठ सालों में वहां देखी थी। शाम 4 बजे के थोड़ी देर बाद, मैं यूं ही नज़र डालने के लिए सड़क की ओर गया और देखा कि सब ओर पानी था।

सोमवार, 29 अप्रैल 2019

समाज में-भाग्य से जूझने के उन दिनों को विदाई

समाज में-भाग्य से जूझने के उन दिनों को विदाई

इशिन
एक पिछड़ा हुआ देहाती गाँव, अपने काम से थके हुए मेरे माता-पिता, वित्तीय कठिनाइयों का एक जीवन... मेरे युवा दिमाग पर इन उदास यादों की छाप पड़ी हुई थी, "भाग्य" के बारे में यह मेरी पहली धारणा थी। स्कूल जाना शुरू करने के बाद, जब मैंने पहली बार मेरे शिक्षक को यह कहते हुए सुना कि "तुम अपने भाग्य को अपने ही हाथों से नियंत्रित करते हो", तो मैंने इन शब्दों को दृढ़ता से मेरे मानस में रख लिया। मेरा मानना था कि हालांकि मैं इस तथ्य को नहीं बदल सकती थी कि मैं गरीबी में पैदा हुई थी, फिर भी कड़ी मेहनत के द्वारा मैं अपने भाग्य को बदल सकती थी। परिणामस्वरूप, अपने "भाग्य" के साथ कुश्ती करने के लिए और स्वर्ग का एक ऐसा टुकड़ा हासिल करने के लिए जिसे मैं अपना कह सकूँ, मैंने अपना पूरा ज़ोर लगा दिया।

गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच के क्रम में

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग पांच के क्रम में
क्या अब तुम लोगों के पास परमेश्वर के अधिकार का एक नया ज्ञान है? पहला, परमेश्वर का अधिकार जिसका अभी जिक्र किया गया, और मनुष्य की सामर्थ में एक अन्तर है। और वह अन्तर क्या है? कुछ लोग कहते हैं कि दोनों के बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती है। यह सही है! यद्यपि लोग कहते हैं कि दोनों के बीच में कोई तुलना नहीं की जा सकती है, फिर भी मनुष्य के विचारों और धारणाओं में कई बार उन दोनों को अगल बगल रखकर तुलना करते हुए मनुष्य की सामर्थ अकसर अधिकार के साथ भ्रम में पड़ जाती है। यहाँ पर क्या हो रहा है? क्या लोग असावधानी से एक को दूसरे से बदलने की ग़लती नहीं कर रहे हैं?

सोमवार, 25 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग चार के क्रम में



परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग चार के क्रम में
सभी चीज़ों व प्राणियों के ऊपर सृष्टिकर्ता के नियन्त्रण और प्रभुत्व की सच्चाई सृष्टिकर्ता के अधिकार के सच्चे अस्तित्व के विषय में बोलते हैं
उसी प्रकार से, अय्यूब के ऊपर यहोवा की आशीष अय्यूब की पुस्तक में दर्ज है। परमेश्वर ने अय्यूब को क्या दिया था? "और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी; और उसके चौदह हज़ार भेड़ बकरियाँ, छः हज़ार ऊँट, हज़ार जोड़ी बैल, और हज़ार गदहियाँ हो गईं" (अय्यूब 42:12)। मनुष्य के नज़रिए से, अय्यूब को दी गई ये चीज़ें क्या थीं? क्या वे मनुष्य की सम्पत्ति थी? इन सम्पत्तियों के द्वारा क्या अय्यूब उस युग में बहुत अधिक धनी हो गया था? उसे ऐसी सम्पत्तियाँ कैसे प्राप्त हुईं थीं? उसका धन कैसे बढ़ा था? यहाँ पर यह बात कही नहीं जा रही है कि परमेश्वर की आशीष के लिए धन्यवाद जिस से अय्यूब ने इन सम्पत्तियों को प्राप्त किया?

रविवार, 24 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग चार



परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग चार
सृष्टिकर्ता के अधिकार को समय, स्थान, या भूगोल द्वारा विवश नहीं किया जा सकता है, और न ही उसके अधिकारों का मूल्यांकन किया जा सकता है
आओ हम उत्पत्ति 22:17-18 को देखें। यह यहोवा परमेश्वर के द्वारा बोला गया एक और अंश है, जिसमें उसने अब्राहम से कहा, "इस कारण मैं निश्चय तुझे आशीष दूँगा; और निश्चय तेरे वंश को आकाश के तारागण, और समुद्र के तीर के बालू के समान अनगिनत करूँगा, और तेरा वंश अपने शत्रुओं के नगरों का अधिकारी होगा। और पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगीः क्योंकि तू ने मेरी बात मानी है।"

गुरुवार, 21 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो

परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग दो
चौथे दिन, जब परमेश्वर ने एक बार फिर से अपने अधिकार का उपयोग किया तो मानवजाति के लिए मौसम, दिन, और वर्ष अस्तित्व में आ गए
सृष्टिकर्ता ने अपनी योजना को पूरा करने के लिए अपने वचनों का इस्तेमाल किया, और इस तरह से उसने अपनी योजना के पहले तीन दिनों को गुज़ारा। इन तीन दिनों के दौरान, परमेश्वर इधर उधर के कामों में व्यस्त, या अपने प में थका हुआ दिखाई नहीं दिया; इसके विपरीत, उसने अपनी योजना के तीन बेहतरीन दिनों को गुज़ारा, और संसार के मूल रूपान्तरण के महान कार्य को पूरा किया।

बुधवार, 20 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग एक



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I)  भाग एक

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग एक
मेरी पिछली अनेक सभाएँ परमेश्वर के कार्य, परमेश्वर के स्वभाव, और स्वयं परमेश्वर के विषय में थीं। इन सभाओं को सुनने के बाद, क्या तुम लोगों को एहसास होता है कि तुम सबने परमेश्वर के स्वभाव की समझ और ज्ञान को प्राप्त किया है? कितनी बड़ी समझ और ज्ञान को प्राप्त किया है? क्या तुम लोग उसे एक संख्या दे सकते हो? क्या इन सभाओं ने तुम सभी को परमेश्वर की और गहरी समझ दी है? क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यह समझ परमेश्वर का सच्चा ज्ञान है? क्या ऐसा कहा जा सकता है कि परमेश्वर का यह ज्ञान और समझ परमेश्वर के सम्पूर्ण सार-तत्व, और जो उसके पास है और जो वह है उसका ज्ञान है? नहीं, बिलकुल नहीं!

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

परमेश्वर का वचन-परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो



परमेश्वर का वचन-परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

परमेश्वर द्वारा इस युग में बोले गये वचन, व्यवस्था के युग के दौरान बोले गए वचनों से भिन्न हैं, और इसलिए, वे अनुग्रह के युग के दौरान बोले गये वचनों से भी भिन्न हैं। अनुग्रह के युग में, परमेश्वर ने वचन का कार्य नहीं किया, किन्तु समस्त मानवजाति को छुटकारा दिलाने के लिए केवल सलीब पर चढ़ने का वर्णन किया। बाइबिल में केवल यह वर्णन किया गया है कि यीशु को क्यों सलीब पर चढ़ाया जाना था, और सलीब पर उसने कौन-कौन सी तकलीफें सही, और कैसे मनुष्य को परमेश्वर के लिये सलीब पर चढ़ना जाना चाहिए। उस युग के दौरान, परमेश्वर द्वारा किया गया समस्त कार्य सलीब पर चढ़ने के आस-पास केंद्रित था।

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

मसीही गीत-सबकुछ परमेश्वर के हाथ में है



मसीही गीत-सबकुछ परमेश्वर के हाथ में है

  • I
  • एक बार परमेश्वर ने ऐसा कहा था:
  • परमेश्वर जो कहता उसके मायने हैं, होकर रहेगा,
  • कोई भी उसे बदल नहीं सकता।
  • वचन चाहे पहले कहे हों या आगे कहे जायेंगे,
  • कोई अंतर नहीं है, वो पूरे होकर रहेंगे, ताकि देख सके हर कोई
  • हर चीज़ जगत की तय करता है परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर।

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

प्रभु यीशु को जानें-परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग पांच



परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग पांच

आगे, आओ हम पवित्र शास्त्र के निम्नलिखित अंश को देखें।
9.यीशु अद्भुत काम करता है।
1) यीशु पाँच हज़ार को भोजन कराता है
(यूहन्ना 6:8-13) उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उससे कहा, "यहाँ एक लड़का है जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो छोटी मछलियाँ हैं; परन्तु इतने लोगों के लिए वे क्या हैं?" यीशु ने कहा, "लोगों को बैठा दो।" उस जगह बहुत घास थी। तब लोग जिनकी संख्या लगभग पाँच हज़ार की थी, बैठ गए। तब यीशु ने रोटियाँ लीं, और धन्यवाद करके बैठने वालों को बाँट दीं; और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बाँट दिया। जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, "बचे हुए टुकड़े बटोर लो कि कुछ फेंका ना जाए।" अत: उन्होंने बटोरा, और जौ की पाँच रोटियों के टुकड़ों से जो खाने वालों से बच रहे थे, बारह टोकरियाँ भरीं।

आध्यात्मिक युद्ध में परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए 3 अचूक तरीके

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